नमामि गंगे प्रोजेक्ट से सात वर्ष में साफ होंगी गंगा

मंदिरों की परिक्रमा करना मैंने बंद कर दिया है अब सिर्फ नालों के चक्कर लगा रही हूं। मेरे सपनों में ही नहीं बल्कि हर वक्त मुझे दूषित गंगा व नाले ही दिखाई पड़ते हैं। यह बात केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती ने कहीं।

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वह शनिवार को सर्किट हाउस में टेनरी संचालकों व जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ गंगा की निर्मलता को लेकर बैठक कर रही थीं। पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा 27 अक्टूबर 2014 को मंत्रालय का नोटीफिकेशन होने के बाद से लेकर दो वर्षो के मध्य गंगा की निर्मलता का पहला चरण पूरा कर लिया जाएगा। अब तक कागजी काम हो रहा था पर अब सभी रिपोर्ट और सर्वे के बाद काम शुरू करने की तैयारी है। कई जगह भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है। आगामी सात वर्षो में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गंगा पूरी तरह से अविरल और निर्मल हो जाएंगी। जो भी टेक्नोलाजी की आवश्यकता है उसे एडाप्ट किया जा रहा है। गंगा सफाई का काम धीमा चलने के प्रश्न पर कहा गंगा एक्सन प्लान की स्थापना 1985 में हुई थी तब से लेकर 2014 तक कोई काम नहीं हुआ। लेकिन अब खुद प्रधानमंत्री और मैंने भी एक बार एनजीआरबी की बैठक ली है। मोदी सरकार के एक वर्ष की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए कहा कि भारत का स्वाभिमान लौट रहा है। आर्थिक और विदेश नीति से देश मजबूत हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि इतना तो नेहरू व इंदिरा के जमाने में भी नहीं हुआ था। राहुल गांधी पर बोलीं कि वह कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण होंगे मेरे लिए नहीं, उनकी किसी टिप्पणी और सवाल का जवाब देना मैं जरूरी नहीं समझती।

आईआईटी से मांगा इकोलॉजिकल फ्लो

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा जैसे जीने के लिए खून जरूरी है है वैसे ही नदी के लिए जल की आवश्यकता है। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों से गंगा के इकोलॉजिकल फ्लो की जानकारी मांगी गई है। ऋषिकेश तक के आंकड़े मिल गए हैं अब गंगासागर तक की जानकारी मांगी गई है जो कि सात आठ दिन में मिल जाएगी।

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One response to “नमामि गंगे प्रोजेक्ट से सात वर्ष में साफ होंगी गंगा

  1. टेनरियों पर नजर, कारखानों से बेखबर
    गंगा प्रदूषण का मुद्दा उठते ही सारा ठीकरा टेनरियों के मत्थे मढ़ दिया जाता है। काफी हद तक यह सच भी है लेकिन दादानगर, पनकी और फजलगंज क्षेत्र में चल रहे कारखानों पर नजर नहीं जाती। शनिवार को टेनरी वालों केंद्रीय मंत्री उमा भारती के सामने यह मुद्दा उठाया, लेकिन जिम्मेदार खामोश बैठे रहे। ऐसे में नमामि गंगे योजना में गंगा को अविरल और निर्मल करने का दावा बेमानी साबित होगा।
    टेनरी वालों के आरोप की हकीकत जानने के लिए रविवार को जागरण टीम खुद ही इन इलाकों का जायजा लेने पहुंची, जो कुछ देखा वह सरकारी कवायद की बखिया उधेड़ रहा था। फजलगंज की ओर से आ रहे विजयनगर नाले से बिल्कुल काला और तीक्ष्ण गंध वाला पानी तेजी से बह रहा था। यह नाला मेहरबान सिंह का पुरवा में पांडु नदी में मिल रहा था। पांडु नदी आगे जाकर महाराजपुर में सीधे गंगा में मिल जाती है। यह पानी दादानगर व पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में चल रहे कई पेपर मिल, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, लेड, बैटरी, बल्ब, डिटरजेंट, होजरी, प्लास्टिक, मसाला व अन्य उद्योगों से आता है। जिनसे निकलने वाला वेस्ट नालों के द्वारा पांडु नदी के रास्ते गंगा में मिल रहा है जिनमें क्रोम, लेड, मैग्नीशियम जैसे अपशिष्ट निकल रहे हैं।
    बैठक में पूरी चर्चा सिर्फ जाजमऊ की 402 टेनरियों पर ही केंद्रित रही। जाजमऊ में 130 एमएलडी, 36 एमएलडी व 5 एमएलडी के ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। शत प्रतिशत तो नहीं लेकिन अधिकांश का पानी पंपिंग ट्रीटमेंट प्लांट से होकर जाता है। सूत्रों की मानें तो जब एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने शहर में गंगा को प्रदूषित करने वाले उद्योगों के आंकड़े मांगे तो नगर निगम, जलनिगम और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने 402 टेनरियों की सूची जमा कर दी। बाद में जब टेनरीवालों ने एनजीटी में अन्य उद्योगों का हवाला दिया तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने टेनरी के साथ 16 अन्य उद्योगों को नोटिस देने और करीब दस को बंद करके कार्रवाई की खानापूरी कर दी। ऐसे में प्रदूषण नियत्रंण विभाग और नगर निगम की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ जाती है। सवाल यह उठता है कि इन दोनों विभागों की रिपोर्टिग के आधार पर क्या नमामि गंगे योजना हकीकत में परवान चढ़ पाएगी।
    एक बार ही लेते हैं सैंपल
    प्रदूषण नियंत्रण विभाग की लापरवाही यह कि गंगा नदी में प्रदूषण की जांच के लिए पानी के सैंपल चार बार लिए जाते हैं लेकिन पांडु नदी जिससे करीब 105 एमएलडी पानी सीधे गंगा में गिर रहा है उसकी सैंपलिंग माह में सिर्फ एक बार ही की जाती है।
    टेनरियों के अलावा शहर के करीब हजारों उद्योगों का अपशिष्ट सीधे गंगा में जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग या नगर निगम उनके बारे में एनजीटी को अवगत नहीं करा रहा है। गंगा के प्रदूषित होने की यह भी बड़ी वजह है।-डा.फिरोज आलम, एक्जीक्यूटिव मेंबर, स्माल टेनर्स एसोसिएशन।
    दादानगर और पनकी में जो भी उद्योग जलीय उत्प्रवाह निकाल रहे थे, बोर्ड के मानक नहीं पूरे कर रहे थे, बगैर सहमति के चला रहे थे ऐसे उद्योगों को पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने बंद करवा दिया। करीब 16 उद्योगों को नोटिस भी दिया गया है। उद्योग अपने खर्च पर ईटीपी भी चला रहे हैं।-मनोज बंका, अध्यक्ष पीआईए।
    1960 में स्थापित औद्योगिक क्षेत्र है, सभी में ट्रीटमेंट प्लांट लगा है, कई उद्योग अपने यहां से उत्सर्जित पानी को रिसाइकिल करते हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग अक्सर चेकिंग भी करता है जो भी नॉम्स बताए जाते हैं उनको पूरा किया जा रहा है।-विजय कपूर, चेयरमैन, को-आपरेटिव इंडस्ट्रियल इस्टेट।

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