आदमखोरों से टकराते हैं कानपुर के साद बिन सैफी

आदमखोरों से टकराते हैं कानपुर के साद बिन सैफी

आदमखोरों से टकराते हैं कानपुर के साद बिन सैफी

गुलदार (लेपर्ड) की चुस्ती से तो हर कोई वाकिफ होगा, लेकिन जब ये जानवर आमदखोर हो जाते हैं, तो इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। कुछ ऐसा ही काम करते हैं कानपुर के नवाब साद बिन सैफी। सैफी ने 4 मई को अल्मोड़ा के पास एक आदमखोर गुलदार को मार गिराया। सैफी अब तक ऐसे 5 ऑपरेशंस में हिस्सा ले चुके हैं।

3 बिग कैट को मार चुके हैं। वह कहते हैं, खत्म हो रही प्रजाति पर गोली चलाना मुश्किल होता है, लेकिन कई बार यह मजबूरी होती है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के जैती गांव में एक आदमखोर गुलदार के आतंक से लोग दहशत में थे। वह 2 इंसानों को मार चुका था और 3 लोग उसके हमले में जख्मी हुए थे। पहाड़ी इलाके में जब गुलदार को पकड़ने की सारी उम्मीदें खत्म हो गईं तो उत्तराखंड के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने कानपुर के नवाब सैफी से संपर्क किया। सैफी 22 अप्रैल को अल्मोड़ा गए और ट्रैकिंग कर लौट आए। कुछ दिन बाद वह दोबारा गए।

लंबे इंतजार, पैनी नजर और सटीक निशाने के सहारे उन्होंने 4 मई को तल्ला बिनौला गांव में नरभक्षी गुलदार को मार गिराया। सैफी के अनुसार, बिग कैट के आमदखोर होने की सिर्फ 2 वजह हैं। कटते जंगल और घटता शिकार। इस कारण वे इंसानी बस्तियों का रुख करते हैं और हम दहशत में आ जाते हैं।

अल्मोड़ा में जिस जगह गुलदार को मारा गया, वहां ऊंची-नीची पहाड़ियां और खाई हैं। अगर ट्रैंक्वलाइज (बेहोश) करें और बेजुबान गहरी खाई में गिर जाए तो भी मौत हो सकती है। सैफी के अनुसार, देश में सरकार ने ऐसे ऑपरेशंस के लिए सिर्फ 12 लोगों को लाइसेंस दे रखा है। इसमें सिर्फ 2 लोग यूपी से हैं। इस गुलदार को मारने के पहले उत्तराखंड वन विभाग ने लिखित परमिशन दी थी।

प्रवीन मोहता, कानपुर

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