बस अड्डे आना तो ठंडा पानी, छांव संग लाना

कानपुर प्रमुख संवाददाता

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शहर का तापमान 44 डिग्री पार। चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़े। इस गर्मी में प्यास बुझाने को ठंडे पानी का इंतजाम नहीं। दो टोटियों से निकलता खौलता पानी मजबूरी में यात्री पीते हैं और वो भी दस-पांच मिनट तक लाइन में लगते हैं। बस अड्डे पर एक भी कवर्ड शेड नहीं। दो खुले शेडों में यात्री किसी तरह दोपहर में बच्चों संग बैठ बसों का इंतजार करते हैं। बस अड्डे पर दिन में चार-छह घंटे का इंतजार किसी कैद खाने से कम नहीं। एसी यात्रियों के लिए बना वातानुकूलित कक्ष भी गर्मी से बेहाल, क्योंकि उसमें लगे दोनों एसी खराब पड़े हैं। रोडवेज बसों में सफर की मजबूरी। इन दिक्कतों से यात्री रोज रूबरू होते हैं। बस अड्डे की बदइंतजामी को देख लगता है कि यात्रियों की इन सुविधाओं की ओर प्रबंधन का ध्यान ही नहीं। शुक्रवार को अंतरराज्यीय बस अड्डे का जायजा लिया। दोपहर में धूप से बचने के लिए कोई खड़ी बस के नीचे आड़ में बैठा था तो कोई खुले टिन शेड के नीचे अपने बच्चे को आंचल से छिपाए। पांच सौ मीटर की परिधि : मेन गेट से घुसते ही चौतरफा धूप और धूल दूर-दूर तक उड़ती दिखी। इंक्वायरी कक्ष के सामने यात्री खुले आसमान में खड़े हो बसों की जानकारी कर रहे थे। इसकी वजह यह थी कि इंक्वायरी खिड़की अंदर पर बाहर खड़े होने के स्थान पर धूप या बारिश से बचने का कोई इंतजाम नहीं।

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