शब-ए-बरातः दुआओं के लिए उठे हाथ, इबादत में गुजरी रात

कानपुर. रोशनी से नहाते इमामबाड़े, कब्रों पर फूलों के ढेर और पास में सजी मोमबत्तियां। दुआओं के लिए उठे हाथ और लबों पर अल्लाह का नाम, शब-ए-रात के मौके पर शहरभर के कब्रिस्तानों में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मंगलवार देर रात मुस्लिम समुदाय ने पूरी अकीदत के साथ इसे मनाया और अपनों को याद किया। कहा जाता है कि इस दिन मांगी गई हर दुआ पूरी हो जाती है। साथ ही गुनाहों की माफी भी मिल जाती है।
अरबी कैलेंडर के आठवें महीने की 15 तारीख को शब-ए-बरात होता है। इसे लैलतुल बरात के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर करीब दो दर्जन कब्रिस्तानों में लोगों ने अपने पूर्वजों की मजारों पर जाकर मोमबत्ती जलाई। देर रात नमाज पढ़ने के बाद लोग कब्रिस्तान की तरफ रवाना हुए।

रातभर चलता रहा इबादत का दौर
इबादत का ये दौर रातभर चलता रहा। इत्र की खुश्बू से पूरा शहर महक उठा। कानपुर के तलाक महल, बेकनगंज, चमनगंज, जाजमऊ, बाबूपुरवा, रोशन नगर, और जूही में मौजूद हर कब्रिस्तान में लोगों ने दुआ मांगी।

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