कैंसर अस्पताल को हुआ कैंसर

जेके कैंसर अस्पताल खुद कैंसर जैसी हालत में है। सभी महत्वपूर्ण अंग (मशीनें) खराब हो गए हैं और सांस किसी तरह चल रही है। मोटा वेतन पाने वाले डॉक्टर-अधिकारी बेपरवाह हैं। यहां समय से मरम्मत न होने के कारण संस्थान में सात करोड़ की लागत से लगी लिनियर एसीलरेटर मशीन 16 जून को बेकार घोषित कर दी जाएगी। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर का एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड मशीन के रेडिएशन विकिरण का लाइसेंस 16 जून को रद कर देगा। दो साल पहले पांच करोड़ रुपये की लागत वाली कोबाल्ट मशीन भी रखे-रखे बेकार घोषित कर दी गई थी। अब संस्थान में रेडियोथेरेपी के लिए सिर्फ एक कोबाल्ट मशीन ही लगी है। जाहिर है कि हजारों मरीजों की समय पर सस्ती रेडियोथेरेपी नहीं हो पाएगी। उन्हें रेडियोथेरेपी के लिए बाहर सौ गुना ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। खास बात यह है कि बेकार मशीन को कंडम घोषित करने के लिए भी लाखों रुपये खर्च करने पड़ेंगे। संस्थान में एमआरआई मशीन भी खराब पड़ी हुई है।

जेके कैंसर अस्पतालजेके कैंसर संस्थान में लिनियर एसीलरेटर मशीन वर्ष 2009 में आई थी। वर्ष 2010 में मशीन से रेडियोथेरेपी शुरू हुई। तीन साल तक जर्मनी की कंपनी सिमेंस से निशुल्क वार्षिक रखरखाव अनुबंध था। इसके बाद हर साल 35 लाख रुपये का अनुबंध शासन ने किया था। तीन साल तक कंपनी मशीन का मेंटिनेंस करती रही। इसके बाद 2013 में कंपनी को जल्द पेमेंट का वादा कर मेंटिनेंस कराया गया। 2014 में मशीन का 35 लाख रुपये का उपकरण खराब हो गया। संस्थान से दो साल का मेंटिनेंस और उपकरण के रुपये की शासन से डिमांड की गई। 2014 के अंत में शासन ने उपकरण के लिए बजट जारी कर दिया लेकिन मेंटिनेंस का पैसा नहीं दिया। इस कारण कंपनी ने उपकरण लगाने और मेंटिनेंस करने से इंकार कर दिया। तब से लगातार शासन को बजट के लिए लिखा जाता रहा। 16 जून 2014 को संस्थान ने भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर को मशीन न चलने की सूचना दी थी। नियम है कि यदि रेडिएशन वाली कोई मशीन एक साल तक लगातार बंद रहती है तो उसके विकिरण रेडिएशन का लाइसेंस रद कर दिया जाता है।

पांच करोड़ की कोबाल्ट मशीन भी कंडम
2012 में जेके कैंसर संस्थान में लगी कोबाल्ट मशीन के कमरे की छत अचानक गिर गई। संस्थान ने शासन से छत बनवाने के लिए रुपये की डिमांड की। दो साल बाद छत के लिए बजट जारी हुआ लेकिन तब तक भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर ने कोबाल्ट मशीन को कंडम करने का आदेश दे दिया। मामला यहीं तक नहीं है। इस कोबाल्ट मशीन को कंडम करने के लिए 20 लाख रुपये देने होंगे। इस रुपये को कोबाल्ट मशीन से निकलने वाले रेडिएशन से होने वाले नुकसान को रोकने पर खर्च किया जाएगा।
जेके कैंसर में दो हजार, बाहर दो लाख तक खर्च
जेके कैंसर संस्थान में रेडियोथेरेपी का खर्च सिर्फ दो हजार रुपये है। एक बार रुपये जमा करने के बाद कैंसर पीड़ित जितनी बार जरूरत हो, रेडियोथेरेपी करा सकता है। बाहर रेडियोथेरेपी का पूरा खर्च दो लाख रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा संस्थान जैसी मशीनें भी बाहर नहीं हैं।

15 हजार कैंसर मरीज हैं रजिस्टर्ड
जेके कैंसर संस्थान में वर्तमान में 15 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज पंजीकृत हैं। इनमें सैकड़ों को रेडियोथेरेपी की लगातार जरूरत पड़ती है। लिनियर एसीलरेटर मशीन खराब हो जाने के कारण मात्र एक कोबाल्ट मशीन के भरोसे मरीजों की रेडियोथेरेपी की जा रही है। इस कारण मरीजों की वेटिंग बढ़ती जा रही है। वर्तमान में तकरीबन एक महीने की वेटिंग चल रही है।

हांफ रही है कोबाल्ट मशीन
कैंसर मरीजों की रेडियोथेरेपी के लिए संस्थान में बची एकमात्र कोबाल्ट मशीन भीड़ के कारण हांफ रही है। इस मशीन में भी कुछ तकनीकी खराबी आ गई है लेकिन मरीजों की जरूरतों को देखते हुए मशीन को चलाया जा रहा है। रोजाना सौ से ज्यादा मरीज रेडियोथेरेपी के लिए आते हैं लेकिन कुछ की ही रेडियोथेरेपी हो पाती है।

हाईकोर्ट की फटकार पर भी नहीं जागी सरकार
वर्ष 2014 में जन उत्थान विधिक सेवा समिति हंसपुरम नौबस्ता की सारिका द्विवेदी और आशुतोष द्विवेदी ने जेके कैंसर संस्थान कानपुर की दुर्दशा को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। कहा गया कि संस्थान में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। लाखों की आबादी के बीच में यही एकमात्र कैंसर का संस्थान है। हर महीने यहां हजारों मरीज आते हैं लेकिन उनको छोटे इलाज के सिवाय कुछ नहीं मिलता। सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने तत्कालीन महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) को छह फरवरी 2015 को तलब किया था। सुनवाई के समय पता चला कि डीजीएमई की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने महानिदेशक पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने शासन को आदेश दिया कि संस्थान में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके बाद से विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरिंदम भट्टाचार्य संस्थान का कई बार निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन बजट नहीं दिला सके।

16 जून तक लिनियर एसीलरेटर मशीन न चली तो भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर इसका लाइसेंस निरस्त कर देगा। यानी मशीन बेकार हो जाएगी। उपकरण का बजट तो आ गया है लेकिन मेंटिनेंस का बजट न आने से कंपनी मशीन ठीक नहीं कर रही है। कंपनी को 70 लाख रुपये देने हैं। कई बार पत्र लिखा जा चुका है। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में पूरा मामला है।
डॉ. एमपी मिश्र, डायरेक्टर, जेके कैंसर संस्थान

जेके कैंसर संस्थान की लिनियर एसीलरेटर मशीन को ठीक कराने को बजट के लिए शासन को लिखा गया है। फिर रिमाइंडर भेजा जा रहा है। बजट जल्ट जारी होगा।
डॉ. वीएन त्रिपाठी, डीजीएमई

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