सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ

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कानपुर वरिष्ठ संवाददाता प्रतिष्ठित कवि, साहित्यकार माखनलाल चतुर्वेदी की पंक्तियां ‘यह पत्थर का हृदय, आंसुओं में धोने दो। कुछ भी मेरा हृदय न तुमसे कह पाएगा, किन्तु फटेगा, फटे बिना न रह पाएगा। इन पंक्तियों से उनका दर्द, बिरह को महसूस करना आसान होगा जिनके अपने वर्षो से घर नहीं लौटे। दरअसल माना जाता है कि सावन के अलग उल्लास लेकर आता है। गर्मी से जहां राहत होती है वहीं चारों ओर बिखरी हरियाली मन को प्रफुल्लित कर देती है। माखनलाल चतुर्वेदी जी की पंक्तियां भी कुछ ऐसा ही संदेश देती हैं। हमने सावन के उल्लास के बीच ऐसे लोगों के मन टटोले जिनके अपने लंबे समय से घर नहीं लौटे। ऐसों का मन निराश, हताश जरूर है लेकिन नाउम्मीद कतई नहीं। उन्हें भरोसा है कि एक दिन लौटेंगे जरूर।बारिश की बूंदों में मिल जाएंगे 35 के आंसू : शहर से लापता युवकों की संख्या 35 है। आधा दर्जन से ज्यादा वह हैं जिनकी शादी को एक साल या उससे कम का समय हुआ है। यह सभी घर छोड़कर चले गए हैं और इनकी पत्नियां अब भी उनका इंतजार कर रही हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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