सावन में हरी सब्जियां और दही से करें परहेज

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मौसम बदला है तो खान-पान भी बदलने की जरूरत है। सेहत को नुकसान न पहुंचे इसलिए डॉक्टरों ने भी सतर्कता बरतने की सलाह दी है। बारिश में बाजार की कुछ चीजें और घर के पकवान आपको लुभा सकते हैं लेकिन इसे खाने से पहने कई बार सोचें जरूर कि इन चीजों से नुकसान तो नहीं होने वाला है? बुखार, उल्टी, लिवर, पेट या स्किन की बीमारी तो नहीं होने वाली है। क्योंकि इस मौसम में कई ऐसी चीजें बाजार में बिक रही हैं जो आपकी सेहत खराब कर सकती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बेमौसम फल, सब्जियां भी सेहत की दुश्मन साबित हो सकती हैं। ऐसा रोग मिल सकता है जो अभी नहीं बल्कि पांच साल बाद असर दिखा सकता है।ऐसा आज की पीढ़ी ही नहीं, बल्कि हमारे बुजुर्ग का भी कहना था। ऐसी कहावतों को डॉक्टरों ने शोध से साबित भी कर दिखाया है। अक्सर बुजुर्ग कहा करते थे कि सावन में हर पत्ते की शाक, मछली, दूध, फ्राई अंडा आदि ऐसी चीजें है जिन्हें खाने से परहेज करो। डॉक्टरों के मुताबिक यह कहावत सटीक है। दरअसल शाक, हर पत्ते की सब्जी, बेमौसम सब्जी में बैक्टीरिया, फंगस, हेल्मेंथ (पेट में पड़ने वाले कीड़े), ऐसे कीट जो बीमारियां एक से दूसरी जगह ले जाने में अहम भूमिका निभाते हैं। बारिश में इनकी संख्या हजार गुना तक बढ़ जाती है। कुछ कीट-पंतगों और बैक्टीरिया, वायरस सिर्फ बीमारी के लिए ही वातावरण में पनपते हैं। उनमें अपनी संख्या बढ़ाने की क्षमता अधिक होती है और इंसान भी उसे बढ़ाने में मदद करते हैं। अंडा, पनीर, दही, मछली, छोला चना, रेड मीट आदि में प्रोटीन की अधिकता होती है। यह प्रोटीन एलर्जी से लेकर दिल की बीमारियों को भी दावत देते हैं। हैलट, उर्सला और प्राइवेट डॉक्टरों की ओपीडी में अधिकतर मरीज प्रोटीन से होने वाली एलर्जी, बैक्टीरिया, वायरस और फंगस से पीड़ित हैं।

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