7 साल से इस गांव में नहीं हुई लड़कों की शादी, अब PM मोदी से उम्‍मीद

कानपुर. आजादी के 68 साल बीत जाने के बाद भी बिजली, सड़क और पानी की सुविधा से कई गांव कोसो दूर हैं। ऐसा ही एक गांव कानपुर के ग्राम सभा सेन पश्चिम पारा में है। इस गांव में आज तक बिजली नहीं आई है। इसकी वजह से गांव के सभी युवा लड़के पिछले सात साल से कुंवारे बैठे हैं। बिजली नहीं होने का असर अब युवाओं की जीवनशैली पर भी पड़ने लगा है। गांव के नौजवानों को अब पीएम मोदी से काफी उम्‍मीदें हैं। मोदी ने बीते स्‍वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से वादा किया था कि वे भारत के एक-एक गांव में बिजली पहुंचाएंगे। अब इन कुंवारों के सिर पर सहरा तभी बंधेगा, जब गांव में बिजली आएगी।
मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम पारा गांव को बसे हुए 300 साल से भी ज्‍यादा हो गए हैं। गांव में पिछड़े वर्ग की संख्‍या काफी ज्‍यादा है और आबादी करीब 700 है। इनमें पुरुषों की संख्‍या करीब 500 और महिलाओं की संख्‍या 200 है। गांव में करीब 30 युवा ऐसे हैं जिनकी शादी की उम्र हो गई है। वहीं, पिछले सात साल से गांव में शहनाई तक नहीं बजी है। इसकी एक खास वजह ये है कि गांव में बिजली नहीं है।
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सरकार बदली, लेकिन बिजली नहीं आई
गांव की कार्यवाहक महिला ग्रामप्रधान के देवर छोटे साहू ने बताया कि जब 90 के दशक में पहली बार मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी थी तो इस गांव को उनसे बहुत उम्‍मीदें थीं। हालांकि, ये उम्‍मीद कुछ दिनों बाद ही टूट गई। इसके बाद अलग-अलग पार्टी की सरकार का आना-जाना लगा रहा, लेकिन किसी ने भी इस गांव की ओर ध्‍यान नहीं दिया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने गांव को अंबेडकर गांव का दर्जा दिया। इसके बावजूद यहां बिजली नहीं आई। शासन-प्रशासन ने भी ग्रामीणों की कभी मदद करने की कोई कोशिश नहीं की।
डरे हुए हैं गांव के कुंवारे लड़के
गांव के कुंवारे लड़कों में एक डर बैठ गया है कि अब कभी उनकी शादी होगी। पिछले सात साल से गांव में शादी की शहनाई नहीं बजी है। गांव के 90 फीसदी युवा लड़के इंटर पास हैं, लेकिन शादी के लिए कोई रिश्‍ता नहीं आता। कोई भी रिश्‍तेदार गांव में आने से पहले पूछता है कि क्‍या गांव में बिजली है। वहीं, बिजली नहीं होने की वजह से कोई भी मां-बाप अपनी बेटी की शादी यहां नहीं करना चाहता है। युवाओं के चेहरे पर शादी न होने के दर्द साफ दिखता है।
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लड़कियों ने संभाली शिक्षा देने की जिम्‍मेदारी
गांव की करीब छह लड़कियों ने बच्‍चों को पढ़ाने की जिम्‍मेदारी संभाली है। ये नि:शुल्‍क रूप से गांव के बच्‍चों को शिक्षित करने का काम करती हैं। इन लड़कियों का कहना है कि वे गांव के बच्‍चों को शिक्षित कर तरक्‍की का रास्‍ता दिखाएंगी। लड़कियों ने ये भी ठान रखी है कि गांव में कानपुर की डीएम रौशन जैकब को बुलाकर यहां की असली तस्‍वीर दिखाई जाएगी। शिक्षित होने के बाद गांव के लोगों को रोजगार मिलेगा और पैसों की कमी भी दूर होगी।
दूसरे गांव में चार्ज करते हैं मोबाइल
गांव की 62 वर्षीय महिला सुमित्रा देवी के मुताबिक, वोट लेने के समय नेता यहां आते हैं और वोट मिलते ही गायब हो जाते हैं। गांव वालों ने यहां बिजली लाने के लिए कई अधिकारियों से भी गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हालात ये हो गए हैं कि मोबाइल भी चार्ज करने के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है।
सपा सरकार ने दरकिनार किया गांव
एक महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कानपुर शहर से करीब सात किमी. दूर कल्याणीपुरवा गांव कानपुर नगर के विठुर विधानसभा के अंतर्गत आता है। यहां के विधायक मुनींद्र शुक्ला हैं। महिला ने कहा कि विधायक कई बार गां वालों से वादा कर चुके हैं कि वे गांव को बिजली देंगे, लेकिन अभी तक सिर्फ आश्‍वासन ही मिला है। कई बार इस गांव को इसलिए भी दरकिनार कर दिया जाता है क्‍योंकि यहां के ज्‍यादातर वोट बसपा को दिए जाते हैं। ऐसे में सपा सरकार गांव में कोई विकास कार्य नहीं कराना चाहती है।
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सुधरेगी गांव की आर्थिक स्थिति
गांव में बच्‍चों की रुचि को देखते हुए कुछ छात्राएं रेणुका अग्रवाल, मोना तुलसियां, रश्मि गोयल और पूजा कपूर ने इस गांव को गोद ले लिया। अब ये छात्राएं यहां नि:शुल्‍क रूप से बच्‍चों को पढ़ाने का काम करती हैं। ये छात्राएं गांव की कई लड़कियों को सिलाई के साथ अन्‍य घरेलू काम भी सिखाएंगी। ये काम करने का उद्देश्‍य सिर्फ इतना है कि गांव के बच्‍चे और लड़कियां शिक्षित होने के बाद आसानी से रोजगार पा जाएंगी। इससे गांव की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार होगा।
इस गांव में कुछ नहीं बदला
गांव की 62 वर्षीय महिला सुमित्रा देवी के मुताबिक, वोट लेने के समय ही गांव में नेता आते हैं। वोट मिलने के बाद सब गायब हो जाते हैं। कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से भी मदद मांगी गई, लेकिन आश्‍वासन के सिवाय कुछ नहीं मिलता। वहीं, 72 वर्षीय बुजुर्ग छेदीलाल के अनुसार, इस गांव में कुछ नहीं बदला। बस बदला है तो इस गांव में तीस साल पहले 35 घर थे जो अब 150 में तब्‍दील हो चुके हैं।
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