कानपुर : यहां जान हथेली पर लेकर पेपर देंगे बच्चे

यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होनी हैं। परीक्षा के लिए जो सेंटर बनाए गए उनमें छात्र दहशत में आ सकते हैं। यह तब है जब प्रशासनिक अफसर केन्द्र निर्धारण से पहले इनके निरीक्षण का दावा करते हैं। इन निरीक्षणों की पोल खोलने के लिए नगर के दो परीक्षा केन्द्र ही काफी हैं। शहर को स्मार्ट बनाने का दावा करने वाले नगर निगम का जूही स्थित श्री रतन शुक्ल इण्टर कॉलेज जिसमें 437 परीक्षार्थियों की जान हर वक्त खतरे में रहेगी। दूसरा हरसहाय जगदंबा सहाय इण्टर कॉलेज जिसे देखकर छात्रों का दहशत में आना स्वाभाविक है। कई अन्य सेंटर भी हैं जो अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

आइए चलते हैं जूही स्थित श्री रतन शुक्ल नगर निगम इण्टर कॉलेज। इस सेंटर के गेट पर ताला था लेकिन गेट से बड़े ‘गेट’ चार स्थानों पर थे जो चारों तरफ बाउण्ड्रीवॉल तोड़ कर बनाए गए हैं। यहां मैदान में आसपास की बस्ती के युवाओं और बुजुर्गो का डेरा था। रोकटोक की कोई व्यवस्था इसलिए नहीं थी क्योंकि कॉलेज में एक भी चौकीदार नहीं है। जो थे वह रिटायर हो चुके। अब बच्चे क्यों न कहेंगे- डीएम सर, मेरी जान की परवाह तो कर लेते। पेपर की सुरक्षा कैसे करें: तीन कक्ष में पेपर रखे हैं जिनमें बाहर से ताला पड़ा है। हाल यह है कि हवा भी तेज चले तो यह दरवाजे गिर सकते हैं। दरवाजे की लकड़ी तक टूटी हुई है। थाने ने इसकी सुरक्षा के लिए फोर्स भेजने से मना कर दिया है। प्रधानाचार्य कहते हैं कि यहां कोई चौकीदार नहीं है।स्मार्ट सिटी का ख्वॉब देखने वाले नगर निगम के इस विद्यालय में आठ कमरे और बरामदे के बीच से प्रधानाचार्य गुजरने से मना करते हैं। कारण? प्लास्टर और पूरा बरामदा इतना ज्यादा जजर्र है कि कभी भी गिर सकता है। कई बार क्लास चलने के दौरान गिर भी चुका है। फिर भी जीर्णशीर्ण स्थिति वाले इस परिसर में बच्चे बोर्ड परीक्षा देने आएंगे। इन कमरों में फर्नीचर भी ऐसा नहीं है कि बैठा जा सके। रसायन विज्ञान विभाग का मार्ग परीक्षा में पूरी तरह बन्द कर दिया जाएगा।

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हरसहाय जगदंबा सहाय इण्टर कॉलेज के भी हाल खराब

हरसहाय जगदंबा सहाय इण्टर कॉलेज शहर के बीच है। प्रबंधकीय विवाद के कारण इसकी देखरेख राम भरोसे है। बड़े कक्ष हैं, लैब हैं लेकिन मेंटेनेंस के अभाव में यह जजर्र हो गए हैं। यहां बैठकर परीक्षा देने में छात्रों का मन शायद ही लगे। पांच सौ स अधिक छात्र यहां परीक्षा देंगे लेकिन सुविधाओं के नाम पर सबकुछ शून्य है। प्रधानाचार्य अस्वस्थ हैं इसलिए यहां केन्द्र व्यवस्थापक की जिम्मेदारी गंगादीन गौरीशंकर इण्टर कॉलेज के एक शिक्षक को बनाया गया है।

जो दावा है वह यह कि जनपदीय स्तर की कमेटी शिक्षा विभाग और विभागीय स्तर पर इसका निरीक्षण करती है। इस कमेटी के अध्यक्ष स्वयं जिलाधिकारी होते हैं। इसके बाद मण्डलीय कमेटी इसकी समीक्षा करती है। इसके अध्यक्ष कमिश्नर होते हैं। हमने तो कई बार शिकायत की। सभी अफसरों को यहां के जजर्र और असुरक्षित भवन व कैंपस की जानकारी है। खतरों की जानकारी के बावजूद सेंटर बनाया गया तो क्या कर सकते हैं।- सूर्य कान्त गुप्ता, केन्द्र व्यवस्थापक 3

 

 

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