हर बुखार डेंगू नहीं है। वायरल भी संभव है। चिकनगुनिया भी हो सकता है।

हर बुखार डेंगू नहीं है। वायरल भी संभव है। चिकनगुनिया भी हो सकता है। डेंगू से भी खौफ नहीं खाएं। डेंगू सामान्य वायरल फीवर से थोड़ा अधिक परेशानी देने वाला है। हैलट-उर्सला अस्पताल के विशेषज्ञ बगैर प्लेटलेट्स डेंगू ठीक कर रहे हैं। सैकड़ों मरीजों का इलाज तो वह ओपीडी से कर चुके हैं। प्राइवेट अस्पतालों ने प्लेटलेट्स का हौव्वा खड़ा कर दिया है। मरीजों के परिवार डेंगू पाजिटिव होने के बाद बेचैन हो रहे।शहर में बुखार पर अफरातफरी है। वायरल फीवर वाले मरीजों की भी डेंगू जांच कराई जा रही है। प्राइवेट अस्पताल प्राइवेट पैथोलॉजी के साथ मिलकर रैपिड किटों की जांच रिपोर्ट मरीजों को दे रहे। रैपिड किट से जांचों पर केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग ने रोक लगाई है। यह डेंगू की रिपोर्ट सही नहीं दे रही। अगर वायरस का कमजोर स्ट्रेन भी मौजूद है तो उससे भी रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। जिस तकनीक से जांच होनी चाहिए वह सिर्फ जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और शहर के दो तीन पैथोलॉजी में उपलब्ध है। हैलट अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक रिपोर्ट आते ही मरीजों के घर में कोहराम मच जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। इस वायरस का भी इलाज 100 फीसदी संभव है। चौंकाने वाली बात यह है कि उर्सला अस्पताल में अभी एक भी डेंगू पॉजिटिव मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी। एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। सभी भर्ती मरीज ठीक होकर गए। उधर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और उर्सला के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की जो भी डिमांड आ रही है वह निजी अस्पतालों से आ रही है। ब्लड बैंक प्रभारियों के मुताबिक हैलट अस्पताल में 10 फीसदी भी सप्लाई नहीं गई।

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