सेंट्रल के आउटर ट्रेन लुटेरों के पनाहगाह

कानपुर। मंगलवार को देररात एक नहीं तीन ट्रेनों में लूट और डकैती की वारदातों की गूंज रेल मंत्रलय में गूंजी। इसका असर गुरुवार को ही दिखा। अपराध से सीधे वास्ता न रखने वाली आरपीएफ उत्तर मध्य रेलवे के आईजी सुनील कुमार सिंह, उत्तर रेलवे के आईजी संजय किशोर, इलाहाबाद के कमांडेंट डीके मौर्या और लखनऊ के हेमंत कुमार कानपुर सेंट्रल पहुंचे। इसके बाद जीआरपी के एसपी केपी सिंह से इन घटनाओं पर मंत्रणा की। इसके बाद पूरी टीम ने गंगाघाट से लेकर मरे कंपनी पुल तक मौका मुआयना किया। एसपी रेलवे केपी सिंह और डीआईजी रामपाल ने बताया कि घटनास्थल के अलावा आसपास बस्तियों में बातचीत के बाद बदमाशों का सुराग लगा है। रामपाल ने दावा किया है कि 24 घंटे के भीतर घटना का पर्दाफाश हो जाएगा। आरपीएफ के आईजी सुनील कुमार सिंह ने प्रभारी राजीव वर्मा संग मंत्रणा की। साथ ही सुनील कुमार सिंह ने कहा कि अपराधों के साथ ही ट्रेनों में किसी कीमत पर अवैध वेंडरों की सक्रियता न हो। कहीं पर कुछ पता चला तो परिणाम भुगतने को तैयार रहें।

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गो¨वदपुरी पुल के पास स्थित बस्ती जहां अपराधी को शरण मिलती है।

झकरकटी पुल के नीचे दूर तक बसी बस्ती जहां पर घटना को अंजाम देने के बाद आराम से अपराधी यहीं घुस जाते हैं।

झकरकटी पुल के नीचे दूर तक बसी बस्ती जहां पर घटना को अंजाम देने के बाद आराम से अपराधी यहीं घुस जाते हैं।

कानपुर ,रेलवे पुलिस और सुरक्षा बल की शिथिलता की वजह से सेंट्रल स्टेशन के चौतरफा आउटर जरायम का अड्डा बन चुके हैं। आउटर के ट्रैक के पास बसी अवैध बस्तियां अपराधियों की पनाहगार बन चुकी हैं। हिस्ट्रीशीटर सागर, इरफान, छोटू, गुलाबी, कुसमा इन्हीं बस्तियों में रहती हैं। इसमें से कई अपराधियों की गिरफ्तारी भी इन्हीं बस्तियों से हुई है। मंगलवार को देररात मरे कंपनी पुल से गंगाघाट के बीच एलटीटी सहित तीन ट्रेनों में हुई डकैती की वारदात ने इस मसले को और पुख्ता कर दिया है। दिल्ली रूट पर गो¨वदपुरी आउटर से जीएमसी, जीएमसी से झकरकटी, झकरकटी पुल से हैरिसगंज, फरुखाबाद रूट पर जूही खलवा पुल, लखनऊ रूट पर मरेकंपनी से गंगाघाट क्रॉसिंग और इलाहाबाद रूट पर कटहरीबाग से शांतिनगर क्रासिंग और शांतिनगर क्रासिंग से होम सिगनल तक कोई पांच सौ अवैध झोपड़े हैं। जबकि इन अवैध झोपड़ों को हटवाने की जिम्मेदारी आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त रूप से है। इसके बावजूद इन बस्तियों को न तो हटाने की कोई कार्रवाई होती है और न ही इसमें पनाहपाने वाले अपराधियों पर। रेलवे पुलिस के डीआईजी रामपाल ने बताया कि इन बस्तियों पर निगाह है। कई लोगों के नाम सामने आए हैं। जल्द ही घटनाओं का पर्दाफाश होगा।

आरपीएफ और जीआरपी के अफसरों के सेंट्रल स्टेशन पर डेरा होने में एक बात सामने आई है कि घटना को जुआरियों ने अंजाम दिया है। ये जुआरी गंगाघाट और सीटी के सामने लोको गेट के पास सुबह से शाम तक फड़ जमाते हैं। अब पुलिस इन जुआरियों पर पैनी निगाह बनाए हैं।

मंगलवार को देररात सेंट्रल स्टेशन के आउटर पर मेमू, वैशाली और एलटीटी एक्सप्रेस ट्रेन में एक घंटे भीतर डकैती की तीन घटनाओं ने एक रिकार्ड बनाया है। जीआरपी सेंट्रल पर वारदात को लेकर मंथन कर रहे डीआईजी रामपाल और एसपी रेलवे केपी सिंह ने जब क्राइम रजिस्टर पर नजर डाली तो पता चला कि सेंट्रल स्टेशन के इतिहास में यह मौका है जब एक घंटे भीतर तीन ट्रेनों में लुटेरों ने डकैती की घटना को अंजाम दिया है। कानपुर सेंट्रल मार्च 1930 में बना था।

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