सब्जियों में आया स्वाद, फल मीठे

आसमान छूती सब्जियों और फलों की कीमतों से अब उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। मंडियों में आपूर्ति ज्यादा होने के चलते इनके थोक में भाव 25 से 30 फीसदी घट चुके हैं। आढ़तियों की मानें तो इस बार बारिश सामान्य से कहीं ज्यादा होने के चलते सब्जियों की फसल थोड़ी प्रभावित हुई थी। वहीं फल आढ़तियों के मुताबिक कश्मीर में चल रहे बवाल का असर सेब पर पड़ सकता है क्योंकि वहां के किसानों और स्टाकिस्टों ने माल कोल्डस्टोरेज में रखना शुरू कर दिया है। थोकमंडी पर बात करें तो पिछले साल 50 रुपए किलो से ऊपर बिकने वाली सब्जियां थोक मंडी में घटकर 30 रुपए किलो से नीचे आ गई हैं। टमाटर की नई आवक से दाम भी काफी नरम हैं। यही हाल सेब और केले का है। आलू और प्याज की हालत सब्जियों में सबसे ज्यादा बुरी है। आलम यह है कि थोक मंडी में इन दोनों ही सब्जियों का कोई भाव नहीं है। पिछले वर्ष सूखा होने की चपेट में सब्जियां आई थीं। जिसके चलते त्योहार के दौरान सब्जियों के दामों में तेजी आई थी।

क माह पहले आलू के भाव में अचानक तेवर आ गए। फुटकर क्या थोक मंडी में इसके भाव 12 रुपए किलो से ऊपर चले गए लेकिन पंजाब से आई नई आलू की फसल से दाम में तेजी नहीं आई। जिसके सामने बेबस किसानों ने कोल्डस्टोरेज से आलू निकालना शुरू कर दिया। आलम यह हुआ कि एक सप्ताह में आलू का भाव मंडी में 4 से 7 रुपए किलो तक पहुंच गए।

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