कानपुर, बाईपास बना दर्द, शहर को चाहिए ‘सर्जरी’

कानपुर-संवाददाता: वाहन बढ़ते ही जा रहे हैं, यातायात अव्यवस्थित है.. ट्रैफिक जैसी समस्या के लिए ये सारी दलीलें अपनी जगह ठीक हैं। मगर, मूल समस्या को नजरअंदाज कर समाधान की तलाश में यूं आगे नहीं बढ़ सकते। दरअसल, शहर का विस्तारीकरण सीमाएं लांघता जा रहा है। बाहरी यातयात को बाहर से ही पास करने को बनाया गया बाईपास शहरी क्षेत्र का लिंक रोड सा बन गया है। नतीजतन, बाईपास एक ऐसा सिरदर्द बन चुका है, जिसकी ‘सर्जरी’ यानी इलाज की जरूरत महसूस होने लगी है। यदि रिंग रोड बन जाए तो शहर को जाम और प्रदूषण से बचाया जा सकता है।

शहर में रोजाना करीब दो से ढाई लाख वाहन जीटी रोड और एनएच 25 से शहर में प्रवेश करते हैं। इसमें करीब 24 से 25 हजार ट्रक, दो लाख कार व टेंपो और ढाई लाख दोपहिया व अन्य वाहन होते हैं। इस दौरान दिन भर में करीब पांच लाख लोग भी सड़कों पर अपने रोजमर्रा के कामों पर निकलते हैं। सड़कों पर लगने वाला जाम और फिर वाहनों के धुएं और धूल से होना वाला प्रदूषण शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए मुसीबत पैदा कर रहा है। जाम में फंसकर लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है, चिड़चिड़ाहट, आंखों में जलन आदि अन्य समस्याएं खड़ी होती हैं।

d3436

Advertisements