कानपुर : पिस्टल लेकर डकैतों के पीछे घूमेंगे जीआरपी के जवान

सर्दियों में दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेन यात्रियों को डकैतों से बचाने के लिए जीआरपी ने कमर कस ली है। एसपी (रेलवे) कवींद्र प्रताप सिंह के अनुसार, खतरनाक पॉइंट्स की पहचान हुई है। रेलवे से फोर्स के लिए पोटा केबिन बनवाने को कहा गया है। यहां जिला पुलिस से भी रात 11 से सुबह 3 बजे तक मदद मांगी गई है। कानपुर सेंट्रल के जीआरपी इंस्पेक्टर के अनुसार, फोर्स को 100 नई पिस्टलें मिली हैं। इसके अलावा ऐसी ट्रेनों की पहचान की गई है, जिनमें अब तक एस्कॉर्ट नहीं चलता था।

kanpur-railway-stationसस्पेंड हुए थे दो इंस्पेक्टर
पिछले कुछ महीनों में कानपुर और आसपास के एरिया में ट्रेनों में डकैती की वारदात में बेतहाशा इजाफा हुआ था। 45 अक्टूबर की रात कानपुर में गंगा पुल से जयपुरिया क्रॉसिंग के बीच डकैतों ने एक घंटे में तीन ट्रेनों में लूट के बाद यात्रियों को चाकू तक घोंपे थे। इसके बाद तत्कालीन जीआरपी इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया था। इस वारदात के पहले भी चलती ट्रेन से युवक को लूटकर फेंकने के अलावा कुछ और वारदात में एक और इंस्पेक्टर निलंबित हुए थे। हालांकि सर्दियों में यात्री सुरक्षा पर गवर्नमेंट रेलवे पुलिस जीआरपी के कान खड़े हो गए हैं।

जिला पुलिस की मदद
एसपी के मुताबिक, गंगा पुल से लेकर पनकी तक कम से कम 10 पॉइंट्स पर रेलवे से पोटा केबिन बनवाने को कहा गया है। ये बन जाने पर घने कोहरे में भी पिकेट के सिपाही यहां आराम से काम कर सकेंगे। इसके अलावा कुछ संवेदनशील पॉइंट्स पर जिला पुलिस से भी रात से तड़के तक 4 घंटे के लिए कंट्रोल रूम की गाड़ियां तैनात करने को कहा गया है। पुराने गैग्स की भी नए सिरे से पहचान हो रही है।

हल्के हथियार बनेंगे काल
वहीं कानपुर सेंट्रल के जीआरपी इंस्पेक्टर त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि फोर्स को 100 नई पिस्टलें मिली हैं। जवान इनकी मदद से बदमाशों से आसानी से मुकाबला कर सकेंगे। इसके अलावा ऐसी ट्रेनों पर जीआरपी की खास नजर है, जिनमें आमतौर पर एस्कॉर्ट नहीं रहता है। इस बार नए पैटर्न पर काम होगा।

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