कानपुर में छोटे नोटों का टोटा, 5 लाख मजदूरों की रुकी पगार

100rupees-10-11-2016-1478788220_storyimageऔद्योगिक शहर कानपुर और देहात के प्रमुख चमड़ा उद्योग के करीब पांच लाख कर्मचारियों मजदूरों को वेतन के लाले पड़ गए। उद्यमियों के पास नए नोट ही नहीं हैं। वहीं, कर्मचारी 500 और 1000 के नोट लेने को तैयार नहीं हैं। गुरुवार को शहर की कई टेनरी और उद्योगों के बाहर कर्मचारी वेतन के लिए खड़े रहे। कई जगह पर पैसा न मिलने के चलते मजदूरों ने काम भी नहीं किया।

जाजमऊ, उन्नाव, बंथर, पनकी, दादा नगर, रनियां, जैनपुर, रूमा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में करीब 10 हजार से ज्यादा उद्योग और एक हजार से ज्यादा टेनरियां है। जहां करीब पांच लाख कर्मचारी काम करते हैं। टेनरियों में हर महीने की नौ और दस तारीख को वेतन बंटता था। आठ नवंबर की रात अचानक पांच सौ और हजार के नोट बंद होने से यहां टेनरी मालिकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। अब वे इतने कर्मचारियों को नकद वेतन देने में सक्षम नहीं हैं। वहीं, कर्मचारी 500 और 1000 के नोट लेने से मना कर रहे हैं।

स्माल लेदर्स एसोसिएशन के सचिव नय्यर जमाल ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी छोटी टेनरियों को हो रही है। सुपर टेनरी के निदेशक इमरान सिद्दीकी ने बताया कि उनकी टेनरी में भी काम नहीं हो पा रहा है क्योंकि मजदूर आफिस का घेराव कर रहे हैं। वे बीते महीने का वेतन मांग रहे हैं। आईआईए के महामंत्री आलोक अग्रवाल ने बताया कि माह की शुरूआत में इस तरह का कदम उठाया जाना चाहिए। सरकार का यह प्रयास सराहनीय है, लेकिन अचानक इस आदेश ने मुसीबत खड़ी कर दी है। ज्यादातर औद्योगिक इलाकों के कर्मचारियों को वेतन बांटने के लाले पड़े हुए हैं।

छापे की दहशत: कानपुर सराफा बाजार बंद

birhanaroad3-10-11-2016-1478791851_storyimageदिवाली में चमके सराफा बाजार में फिर से मायूसी छा गई है। सहालग सीजन में बाजार बंद होने से कारोबारियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कारोबारियों के मुताबिक बाजार खोला तो इनकम टैक्स और सेल्स टैक्स की जांच की भी परेशानियां उन्हें उठानी पड़ सकती हैं। वह अपनी दुकानें बंद करने में ही भलाई समझ रहे हैं।

बिरहाना रोड, लालबंगला, नयागंज, गोविन्द नगर, चौक, धोबी मोहाल जैसी प्रमुख सराफा मार्केट लगातार दूसरे दिन भी बंद रहीं। बाजारें बंद होने के चलते ग्राहकों को खासी परेशानियां उठानी पड़ीं। कारोबारियों ने बताया कि सहालग होने के दौरान सरकार का ये सर्जिकल स्ट्राइक है। मार्केट में इस तरह कि स्थिति आने वाले एक सप्ताह तक बाजार में कायम रहेगी। नयागंज के सराफा कारोबारी पंकज अरोड़ा ने बताया कि किसी तरह दिवाली के बाद मार्केट में ग्राहकों की कुछ चहल पहल शुरू हुई थी। जो फिर से थम गई है। क्यों कि सराफा कारोबारियों के पास माल होने के बावजूद बड़े नोट से वह व्यापार नहीं कर पा रहे हैं। कारोबारी नटवर मिश्रा ने बताया कि व्यापारी किसी तरह की परेशानी में नहीं पड़ना चाहते हैं। क्योंकि बाजार खुलने के बाद ग्राहक खरीदारी करेंगे जो इनकम टैक्स और सेल्स टैक्स अफसरों के निगाह में आएगी। व्यापारी परेशानियों से बचने के लिए अपने आप बाजार को बंद करना महसूस समझ रहे हैं।

आजादी के बाद यहां पहली बार बिके नोट, मची अफरा तफरी

कानपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देर रात एकाएक टीवी पर लाइव संबोधन कर पांच और एक हजार के नोटों पर तत्काल प्रभाव से लेन देन पर रोक लगा दिया। इससे यह नोट कानपुर में जमकर बिका। चिल्लर रखने वालों ने पांच सौ के नोट तीन सौ और एक हजार नोट को सात से आठ रुपए लेकर खरीदा। नयागंज बंद कर जवाहर नगर, बिरहना रोड, मालरोड, आरबीआई के पास, कल्याणपुर, रहमानी मार्केट, सागर मार्केट, बसंत बिहार, रमादेवी पर चिल्लर रखने वालों ने बड़े नोट पर मनमुताबिग पैसे दिए। चिल्लर रखने वालों के शिकार बाहर जिलों से आए कारोबारी सबसे ज्यादा हुए। नयागंज में किराना का थोक सामान लेने आए घाटमपुर के परास निवासी राजू चौरसिया ने बताया कि कल रात हम बड़े नोट लेकर आए। थोक दुकानदार ने सामान दे दिया, लेकिन रात नौ बजे के बाद उसने सामान देने से मना कर दिया। जब हमें पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने की जानकारी हुई तो हमारे पैरों के तले से जमीन खिसक गई। पूरी रात नयागंज चौराहे पर गुजारी और सुबह घर जाने के लिए पांच सौ के बदले यहीं के एक दुकानदार ने तीन सौ रुपए दिए।
मंगलवार को रात नौ बजे के बाद ज्यों ही पीएम नरेन्द्र मोदी ने 500 व 1000 की नोटों को चलन से बाहर करने का बयान दिया। इसके बाद शहर में देर रात से लेकर अगले दिन रात नौ बजे तक अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त रहा। सबसे परेशानी बाहर से दुकानदार, कारोबारियों को उठानी पड़ी। इसके साथ ही पेट्रोल पंपों, हास्पिटलों, रेलवे टिकट घरों में लोगों की भीड़ 22 घंटे से बरकार है। आलम यह रहा कि देर रात तक पेट्रोल पंपों में लोग डीजल पेट्रोल भराने के लिए मशक्कत करते रहे> पुखरायां निवासी रिजवान अपने बेटे का इलाज के लिए चांदनी हॉस्पिटल एडमिट कराया था। रमजान ने बताया कि रात को जैसे बड़े नोट बंद होने की बात सामने आई तो मेडिकल स्टोर वालों ने मेडिसिन देने से इंकार कर दिया। बाहर पान के दुकानदार ने दस हजार लेकर सौ-सौ के सात हजार रुपए दिए। रमजान ने बताया कि हम गांव के लोग हैं चेक और एटीएम रखते नहीं, पत्नी से गहने गिरवीं रख चिल्लर पैसे लाने को कहा है। ऐसे ही सैकड़ों लोगों ने पांच सौ और एक हजार ने नोट कम कीमत पर बेचने को मजबूर हुए। अर्थशास्त्री राजेश श्रीवास्तव के मुताबिक कानपुर शहर में बड़े नोट की जमकर बिक्री और खरीदारी हुई है। बजार में कारोबार तो ठप रहा, लेकिन नोट के बदले नोट का मोल भाव खूब हुआ। लगभग पचास करोड़ रुपए के बड़े नोट बेचकर लोगों ने सौ और पचास के नोट लिए।
88 पेट्रोल पंपों में अफरा-तफरी
देर रात पीएम के फरमान के बाद लोगों की भीड़ इस कदर रही कि शहर के 88 पेट्रोल पंपों में लगभग सभी में नोक झोक हुई। फूलबाग पेट्रोल पंप में तो युवकों व कर्मियों के बीच मारपीट तक हो गई। यही हालात हॉस्पिटलों में रही तीमारदार एडवांस रूपया देने के लिए गुहार लगाते देखे गये। वहीं मेडिकल स्टोरों में दवाइयों के लिए तीमारदार फुटकर न होने के चलते बकाया रूपया भी छोड़ रहे हैं। रीजेन्सी अस्पताल में कन्नौज के भर्ती मरीज रामकिशन के परिजन सुभाष ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन मंगलवार रात से रूपया लेना बंद कर दिया है और मरीज के इलाज में लापरवाही का भी आरोप लगाया।
यात्रियों ने एक हजार के बदले लिए 7 सौ
झकरकटी बस अड्डे में यात्री विनोद दुबे ने बताया कि परिचालक 500 व 1000 की नोट लेने से साफ मना कर रहें है। पीएम के फैसले से आम जनता तो खूब हलाकान रही लेकिन कोई भी बड़ा आदमी इस तरह परेशान होता नहीं दिखा। इंदौर से एक काम के लिए शताब्दी बस से कानपुर आए विपलव राजपूत ने बताया कि शाम को फजलगंज में जैसे ही बस पर मैं सवार होने लगा तो कंडेक्टर ने खुले हों तो बैठना। मैं बस से नीचे उतर आया। तभी बस स्टैंड का एक कर्मी ने कहा कि मेरे पास चिल्लर हैं चाहो तो ले लो लेकिन एक हजार के बदले सात सौ दूंगा। दो हजार के नोट के बदले उसने मुझे सौ-सौ के 14 नोट दिए।
दैनिक वस्तुओं के लिए मारामारी
सुबह से ही दैनिक वस्तुओं की खरीददारी के लिए लोग फुटकर को लेकर परेशान होते रहे। चाहे वह दूध हो, ब्रेड हो या अन्य खाद्य सामग्री। दुकानदार 500 व 1000 नोट लेने से साफ मना कर रह रहे थे। जिससे बहुत से लोग दैनिक वस्तुएं नहीं ले सके। हालांकि दूध के उत्पादों को इस फैसले से बाहर 72 घंटे के लिए बाहर रखा गया है। इसके बावजूद दूध कंपनिया दुकानदारों से यह नोट लेने से साफ मना कर दिया है। यहां भी दुकानदारों ने पांच सौ रुपए का भाव तीन सौ रखा।
कानपुर की सब्जी मण्डी में रोज की अपेक्षाकृत ग्राहक कम नजर आ रहे थे और जो कुछ थे वे अपनी जेब के फुटकर रूपये सम्भाल सम्भाल कर खर्च कर रहे थे। बावजूद वहां झगड़े का नजारा भी मौजूद था। एक महिला ने सब्जी खरीदने के बाद पांच सौ के नोट भुगतान में देने चाहे। दुकानदार ने इसे लेने से मना किया तो वो सब्जी का भरा थैला उठाकर चलती बनी और कहते हुए गयी कि बच्चों को भूखा थोड़े ही मारना है। अब जब पैसे होगें तब आकर दे जाउॅगीं। दुकानदार ने महिला को रोककर सब्जी के पैसे लेने के साथ ही पांच सौ को तीन में खरीदा। महिला ने भी अपनी मजबूरी समझ तीन सौ रुपए लेने को विवश हुई।
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