कानपुर सेंट्रल पर अफरातफरी और बस अड्डे पर परेशान रहे यात्री

कानपुर : पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों की दिक्कत से जूझ रहे लोगों को शुक्रवार को सफर का संकट खड़ा हो गया। रेलवे ने कानपुर-लखनऊ रूट पर 27 दिनों का मेगा ब्लॉक ले लिया। गंगाब्रिज ट्रैक के मेंटीनेंस का काम कराने की वजह से लखनऊ रूट की 65 ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया। कई ट्रेनों को दूसरे रूटों से निकालने का फैसला किया गया है। इसके अलावा सभी मेमू का संचालन उन्नाव से शुरू कराया गया। लखनऊ रूट की मेमू और अन्य ट्रेनों के बंद होने से पहले दिन ही यात्री भटकते दिखे। कोई रोडवेज बस अड्डा पूछते नजर आ रहा था तो कोई उन्नाव जाने के लिए टेंपो स्टैंड की जानकारी कर रहा था। हालत यह थी कि बड़ी संख्या में लोग जानकारी के अभाव में सेंट्रल स्टेशन पहुंचे। मेमू का टिकट लेने को लाइन में लगे, नंबर आने पर पता चला कि आज मेमू कानपुर से नहीं चलेंगी। इससे स्टेशन पर दोपहर तक अफरातफरी का माहौल रहा। पूर्व निर्धारित फैसले के तहत बीती रात 12 बजे के बाद से मेगा ब्लॉक शुरू हो गया था। शुक्रवार को मेंटीनेंस का काम भी ठेकेदार के कर्मचारियों ने शुरू कराया। बीच-बीच में ट्रेनों के पास कराने की वजह से काम करने में कठिनाई भी आ रही थी। रेलवे ने देरशाम पूरी क्षमता से काम शुरू करा दिया था। इंजीनियिरंग अमले का कहना है कि वैसे तो समय से काम पूरा करने की तैयारी है फिर भी बड़ा काम है। इस कारण दो-चार दिन का समय और भी लग सकता है।

दिवाली बाद एकाएक रोडवेज बस अड्डा झकरकटी में यात्रियों की भीड़ पहुंची। दिवाली के एक दिन पहले जैसा नजारा झकरकटी में सुबह से ही दिखने लगा था। लगभग दो सौ अतिरिक्त बसों का अतिरिक्त संचालन होने की वजह से बस अड्डे से लेकर टाटमिल चौराहे तक सुबह से शाम तक कई बार जाम लगा। इसका अंदाजा इसी से लगा कि रोडवेज की अड्डे के भीतर जाने वाली बसों की रुक-रुक कर लाइनें लगतीं, तभी पुल से बस अड्डे को आने वाली बसों से पूरा जीटी रोड का रास्ता ही बंद हो जाता। इससे राहगीरों तक को निकलने में दिक्कतें हुईं। ट्रैफिक अमला भी मुस्तैद था पर बसों की लाइन की वजह से वह भी कई बार लाचार दिखा।

दैनिक यात्रियों के लिए जीवनधारा कहलाने वाली गोमती एक्सप्रेस के निरस्त होने का रेलवे अफसरों ने विकल्प तैयार किया है। डिप्टी सीटीएम जितेंद्र कुमार ने शुक्रवार को परिचालन स्टाफ संग बैठक की। स्पष्ट निर्देश दिए कि सुबह लगभग साढ़े सात बजे इटावा को जाने वाली मेमू किसी कीमत पर लेट न चलाई जाए। इस ट्रेन को प्राथमिकता के आधार पर इटावा ले जाया जाए। इसका मतलब हरहाल में साढ़े तीन घंटे में मेमू वहां पहुंचा दें। इससे नौकरीपेशा लोग जाते हैं। उधर, ट्रेनों के रद होने पर यात्रियों में भी गुस्सा दिखा। उनका कहना था कि जब शताब्दी, पुष्पक सहित 63 ट्रेनें चल रही हैं तो मेमू को ही पूरी तरह से क्यों बंद किया गया। सुबह और शाम की मेमू चलाते रहे तो दैनिक यात्रियों को किसी तरह की दिक्कतें न होती। बदलाव होने के बावजूद प्रापर तरीके से एनाउंसमेंट भी नहीं कराया जा रहा जबकि हर दिन बाद एनाउंसमेंट कराना चाहिए।

सेंट्रल पर होता रहाट्रैक का मरम्मतीकरण।

कानपुर-लखनऊ के बीच चलने वाली सभी मेमू निरस्त होने का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ा। मेमू से आम लोग 20 रुपए देकर लखनऊ पहुंचते थे पर शुक्रवार को उन्हें इसके स्थान पर सौ रुपए खर्च करने पड़े। स्टेशन से पांच रुपए देकर बस अड्डे पर और वहां से 92 रुपए देकर लखनऊ। ट्रेनों से हरहाल में पौने दो या दो घंटे में पहुंचते थे पर बसों से कम से कम तीन या साढ़े तीन घंटे यात्रियों को लगे।

सेंट्रल स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर तीन और दस भले ही कुछ दिनों के बंद हैं। दोनों स्टेशन जब वाशेबिल एप्रन हो जाएंगे तो ट्रैक के नीचे दिखने वाली गंदगी नहीं रह पाएगी क्योंकि तब सुबह और शाम नियमित धुलाई हो जाएगी क्योंकि दोनों प्लेटफार्म के ट्रैक के नीचे कंक्रीट होगा और पानी का प्रेशर खोलने से तत्काल साफ हो जाएंगे। – जितेंद्र कुमार,उप मुख्य यातायात प्रबंधक कानपुर सेंट्रल

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