ऐसे होगी लापरवाही तो क्यों न होंगे हादसे – हांफ रहा ट्रैक, सो रहा सिस्टम

कानपुर:उदाहरण से इंतजामों को समझने का प्रयास करें तो समझ लीजिए कि ट्रेनों से सफर पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान सकते। हादसे तो कई हुए हैं, लेकिन पुखरायां के ताजा दर्दनाक हादसे में जिस तरह से रेलवे की लापरवाही की चर्चा है, वह कई बिंदुओं पर नजर गड़ाने को मजबूर करती है। ऐसा करने पर रावतपुर स्टेशन का ट्रैक बतौर उदाहरण मिल गया। मानक कहते हैं कि डिस्ट्रेसिंग सहित मेंटीनेंस साल में दो बार होना चाहिए, लेकिन आठ माह से मरम्मत न होने की लापरवाही तो कागज भी बयां कर देंगे।

11 जुलाई 2011 में हुए मलवां रेल हादसे के बारे में तत्कालीन मुख्य संरक्षा आयुक्त पीके बाजपेई ने रिपोर्ट में बताया था कि ट्रैक पर क्षमता से अधिक लोड डाला जाता है। ट्रैक और कोच का मेंटीनेंस समय पर नहीं होने पर हादसे होने की पुष्टि की थी। हालांकि विभागीय जांच अभी चल रही है। इसी बीच पुखरायां और मलासा स्टेशन के बीच हुए हादसे में 150 लोगों ने अपनी जान गवां दी। अब हम महज उदाहरण के लिए रावतपुर रेलवे स्टेशन को ही लेते हैं। इस रूट से 10 एक्सप्रेस ट्रेन सहित 20 पैसेंजर गाड़ियां और पांच मालगाड़ियां निकलती हैं। जानकारों के मुताबिक, ट्रैक की क्षमता इतनी गाड़ियों के सहने की नहीं है। रेलवे के अधिकारिक सूत्र बताते हैं कि डिवीजन बदलने का दर्द रेलवे ट्रैक को ङोलना पड़ रहा है। मानक से ज्यादा लोड है। पिछले एक साल से मेंटीनेंस के नाम पर कोई काम नहीं हुआ है, साथ ही पिछले एक साल से ट्रैक डिस्ट्रेसिंग के लिए मोहताज है। पैसा न मिलने पर सफाई के नाम पर अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसी स्थित में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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