प्रभु की खूनी ट्रेन से जमकर लड़ी मर्दानी, परिवार के आठ सदस्यों की बचाई जान

विनोद निगम.
कानपुर. पटना साहेबनगर निवासी अपने परिवार के आठ सदस़्य व गांव के ही तेरह लोगों के साथ महाकाल के दर्शन के लिए गए थे | इंदौर-पटना एक्सप्रेस में सवार होकर वह घर वापस आ रहे थे | 21 तीर्थयात्री एक ही बोगी में बैठे थे कि अचानक पुखरायां के पास ट्रेन हादसे का शिकार हो गई और कई लोग काल के गाल में समा गए | इसी दैरान अपने पति बेटे व परिवार के पांच सदस्यों को बोगी के अंदर फंसा देख पटना की इस मर्दानी ने जख्मी हालत में पहले बेटे को बाहर निकाला | बोगी के अंदर अंधेरा था अन्य सदस्य जिन्दगी और मौत के बीच लड़ रहे थे, तभी मर्दानी ने आवाज लगा लगाकर सभी को बाहर निकाला | 3 घंटे तक मर्दानी खूनी ट्रेन से जमकर लड़ी और उसके शरीर से खून बहता गया | सभी को बोगी से बाहर लायी और सदस्यों सहित बेहोश हो गई | जब होश आया तो हैलट में अपने परिवार के सदस्यों के साथ आईसीयू में पाया | डॉक्टरों की निगरानी में सभी का इलाज चल रहा है | लेकिन जब मर्दानी को अपने गांव के तेरह सदस्यों के लापता होने की जानकारी मिली तो आंख से आंसू छलक पड़े | महिला ने बताया कि वह अपने परिवार व गांव के 13 सदस्यों के साथ महाकालेश्वर के दर्शन करने के लिए गए थे, लेकिन ट्रेन हादसे ने उनकी सारी खुशियां पलभर में छीन लीं |
phpthumb_generated_thumbnail-1मूलरुप से पटना साहेबनगर में रहने वाला प्रमोद दूरदर्शन कार्यालय में आपरेट है वहीं पत्नी रेखा हाउस वाइफ हैं | रेखा ने बताया कि पति, प्रमोद, बेटे विशाल रंजन के साथ महाकालेश्वर दर्शन करने के लिए उज्जैन गये थे। उनके साथ गांव के ही 21 परिवार थे। बताया कि उनका परिवार व 21 लोगों ने एक साथ शिरडी, महाकालेश्वर और कई भोलेनाथ मंदिरों में दर्शन करके वापस शनिवार की रात इंदौर पटना एक्सप्रेस से लौट रहे थे, सभी का रिजर्वेशन था। महिला ने बताया कि झांसी में ट्रेन रुकने पर वह जग गई और शिव का जाप करने लगी। ट्रेन कानपुर देहात के पुखराया पहुंची ही थी कि अचानक एसी कोच में धड़धड़ की आवाज होते ही 14 डिब्बे पटरी से उतर गये। हादसे को देखकर बोगी में बैठे यात्रियों व परिवार की सकुशल सलामती के लिए महिला रेखा ने पहले जोर-जोर से महामृत्युंजय का जाप किया, लेकिन उसके सामने बीस से ज्यादा मुशाफिरों की सांसे थम गईं और बोगी में बैठा परिवार बीच में फंसकर जिन्दगी और मौत के बीच जूझने लगा |
मां बहुत दर्द है पापा और दादा खो गए
हासदे के बाद पूरा परिवार एक पल में मौत के मुंह के मुहाने पर खड़ा हो गया | रेखा ने हिम्मत कर पहले अपने आपको बाहर निकाला और फिर सभी से कहा कि शिव का जाप करें | मां की बात सुनकर बेटे शिव जाप करने लगे। आवाज के बल पर रेखा ने लगातार तीन घंटे तक अपने परिवार के सातों सदस्यों को बाहर निकाला | पति के सिर पर गहरी चोट थी तो सास ससुर के दोनों हाथ पैर फैक्चर थे | वहीं रेखा के शरीर पर भी गहरे घाव थे, जिनसे खून रिस रहा था | रेखा ने धोती फाड़कर पेट में लगे गहरे घाव को बांधा और अपने कुनबे को बचाने के लिए जुट गई | भीषण रेल हादसे में रेखा ने अपने परिवार समेत आठ लोगों की जान बचाई तो वहीं इस घटना के बाद से 13 लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। इस हादसे में 8 लोग मामूली घायल है, जिनका इलाज हैलट अस्पताल में किया जा रहा है।
13 लापता का जीआरपी लगा रही पता
महाकालेश्वर के दर्शन के बाद इन्दौर एक्सप्रेस रेल हादसे में 21 तीर्थयात्री शिकार हो गये। जिसमें 8 लोग तो घायल है और 13 का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घायलों में प्रमोद, उनकी पत्नी रेखा दो बेटे विशाल, अमित, मदनराम, फूलादेवी, अशोक, रविन्द्र पाण्डेय है। वहीं इस हादसे के बाद से फूलादेवी की बहू शकुन्तला, बेटा संजय, अशोक की पत्नी राधिका, समेत 13 लोगों का पता नहीं चल पा रहा है। जीआरपी और आरपीएफ का कहना है कि 13 तीर्थ यात्रियों का पता लगाया जा रहा है।
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