RBI के दावे झूठे, रोजना चाहिए 350 करोड़ करोड़ रूपए – Money crisis in all Banks of Kanpur

कानपुर। प्रधानमंत्री ने 16 दिन पहले 5 सौ और 1 हजार रूपए के नोटबंद कर दिए थे। नोटबंदी के चलते जहां देश की संसद में विरोधी दल हंगामा कर रहे हैं, वहीं आमशहरी सुबह से बैंक और एटीएम के बाहर खड़े होकर लाइन लगा रहे हैं। दोपहर आते-आते अधिकतर बैंकों में करेंसी खत्म हो जाती है और बैंक कर्मचारी ताला जड़कर आराम फरमाते हैं। घाटमपुर में सुबह से स्टेट बैंक की शाखा पर ग्राहक लाइन पर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। 12 बजे बैंक के मैनेजर ने करेंसी खत्म होने की बात कह ग्राहकों को वापस कर दिया। ऐसे कई बैंक हैं जहां हर रोज दोपहर आते-आते करेंसी बैंक से खत्म हो जाती है। करेंसी की उपलब्धता न होने पर बैंक के अधिकारियों ने कानपुर कमिश्नर आवास में हुई बैठक में रिजर्व बैंक को कटघरे में खड़ा किया है। बैंक के अधिकारियों ने कमिश्नर को बताया कि कानपुर को हर दिन 60 से 70 करोड़ रूपए दिए जाते हैं, जबकि खपत 350 करोड़ के ऊपर है।
डीएम ने आरबीआई के दावे को बताया झूठा
डीएम कौशलराज शर्मा ने भी कहा कि आरबीआई की ओर से पेश किया जा रहा आंकड़ा सही नहीं है। सिर्फ कानपुर में सभी बैंकों को रोजाना करीब 350 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है, जबकि रिजर्व बैंक की ओर से 50-60 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं दिया जा रहा है। दोपहर 12 बजे के बाद ही यहां के सैकड़ों बैंक खाली हो जा रहे हैं। बैंकों में रुपये न मिलने से परेशान लोगों के फोन दिन भर आते रहते हैं। रिजर्व बैंक की करेंसी सप्लाई यदि इतनी दुरुस्त है तो फिर बैंकों में करेंसी न होने की नोटिस क्यों चस्पा किए जा रहे हैं।
गांवों में नहीं पहुंच रही करेंसी
डीएम कौशल राज कमिश्नर से मिले और नोटबंदी के जमीनी हकीकत से उन्हें अवगत कराया। सूत्र बताते हैं कि डीएम ने कमिश्नर को बताया है कि गांवों की बैंकों में समय से पैसे नहीं पहुंच रहे हैं, जिसके चलते किसान हलकान हैं। नोटबंदी का असर गेहूं की बुआई पर पड़ रहा है। अगर रिजर्व बैंक ने पैसे ग्रामीण अंचलों में चल रहे बैंकों पर नहीं भेजे तो हालात बहुत खराब हो जाएंगे। कमिश्नर ने आरबीआई के अधिकरियों को तलब कर बैंकों में समय से करेंसी पहुंचाने की अपील की है।
4 सप्ताह में हालात हो जाएंगे ठीक
रिजर्व बैंक के उप महाप्रबंधक सुशील द्विवेदी ने कहा कि करेंसी का फ्लो धीमा जरूर है लेकिन ऐसा नहीं है कि नोट न होने की वजह से कहीं काम बंद हुआ हो या किसी को कम रुपये दिए जा रहे हों। इस पर डीएम ने कहा कि दो बातें एक साथ नहीं होनी चाहिए कि करेंसी का फ्लो ठीक है और बैंकों में रुपये पहुंच भी नहीं रहे हैं। कमिश्नर मो. इफ्तेखारुद्दीन ने आरबीआई अधिकारी से सवाल किया सही स्थिति क्या है वे खुद स्पष्ट करें। करेंसी की दिक्कत कितने दिनों में सामान्य हो पाएगी। इस आरबीआई अधिकारी ने बताया कि करीब तीन से चार सप्ताह में स्थिति दुरुस्त हो जाएगी।

 इस ब्यूरोकेट्स ने कहा पब्लिक भड़के तो बात नहीं चलानी चाहिए लाठी

कानपुर। यूपी के सीएम अपने ब्यूरोकेट्स को पब्लिक के साथ अच्छा बर्ताव करने की सलाह कभी न कभी देते रहते हैं, लेकिन इन्हीं के डीएम ने नोटबंदी को लेकर मंडालायुक्त कैम्प में बुलाई गई बैठक में बेतुका बयान देकर माहौल खराब कर दिया। बैठक की अध्यक्षता दुर्गा प्रसाद मिश्र अपर सचिव वाणिज्यकर विभाग केंद्र सरकार और मंडालायुक्त कानपुर रहे थे। वह मंडल के डीएम और एसएसपी से नोटबंदी को लेकर आ रहीं समस्याएं और इनके निराकरण के सुझाव मांग रहे थे, तभी कानपुर देहात के डीएम रविकांत मुखातिब हुए। डीएम ने अपर सचिव से कहा सर मेरा एक सुझाव है जनधन खातों की जांच की जानी चाहिए। जो लोग बार बार बैंक में लाइन लगा रहे हैं उन्हें चिन्हित कर जेल भेजना चाहिए। साथ ही जो बैंकों के बाहर हुड़दंग करते हैं उन्हें बातों से नहीं लाठी से समझाना चाहिए। डीएम के यह बात सुन मंडलायुक्त मोहम्मद इख्तेखारुद्दीन भड़क गए। डीएम की ओर मुखातिब होकर बोले, देखो मिस्टर यहां कानून का राज है। कानून सभी को गरिमामय जीवन बसर करने का मौका देता है। ब्यूरोकेट को किसने यह आदेश दिया है कि वह पब्लिक पर डंडे बरसाए और कालेधन की जांच करे।
मिस्टर यह अधिकार किसने आपको दिया
मंडलायुक्त ने बीच सभा में कानपुर देहात के डीएम की जमकर खिंचाई की। कहा कि ब्यूरोकेट को किसने अधिकार दिया है कि वह पब्लिक पर डंडा चलाए। हम लोग कौन होते हैं कि यह तय करने वाले कि लोग बैंकों में कालाधन जमा कर रहे हैं। ब्यूरोकेट्स विमुद्रीकरण से उपजे हालात पर चर्चा करने को जुटे हैं। पब्लिक को राहत मिले इसके लिए इकठ्ठा हुए हैं। यह आपका काम नहीं है कि किसका धन काला है। सभी को डिसऑनेस्ट कैसे करेंगे ? इसका हमें सिर्फ पालन करना है। डीएम साहब हद पार करने का अधिकार आपको किसने दिया है।
डीएम साहब हम आप पब्लिक सर्वेन्ट हैं
कमिश्नर कानपुर देहात की बात से इतने आहत दिखे कि उन्होंने उनकी जमकर क्लास ली। देहात में चल रहे विकास कार्यों सहित अन्य योजनाओं की जानकारी देने को कहा, जिस पर डीएम ने सॉरी सर कह कर कुर्सी पर बैठ गए। कमिश्नर ने डीएम कुमार से कहा कि डीएम साहब आप राजा नहीं पब्लिक के नौकर हैं। आपकी सोच बताती है कि आप जनता की सेवा के बजाय रौब के बल पर देहात में नौकरी कर रहे हैं। इस पर डीएम कुमार ने अपने बयान पर माफी मांगते हुए जनता के साथ लाठी से नहीं जुबांन के जरिए काम करने का भरोसा दिया।
सबसे ज्यादा शिकायतें आपके जिले की
कमिश्नर ने कहा कि तहसील दिवस की शिकायतें पूरे मंडल में सबसे ज्यादा कानपुर देहात से आती हैं। इस पर कैसे रोक लगे डीएम साहब आप बताएं। लोग कानपुर नगर आकर मुझसे समस्याएं बताते हैं। कमिश्नर ने डीएम कुमार को नसीहत दी की आप यूपी सरकार के दिए गए निर्देशों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करते। जिस तरह से आपने पब्लिक पर डंडा चलाने का बयान दिया है वह अशोभनीय है। कानपुर देहात में चल रहे विकास कार्यों की लिस्ट पांच दिन के अंदर मंडलायुक्त कार्यालय में भेजें।

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