बंदर डराते, दौड़ाते जानवर

कानपुर : सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने गए हैं और हाथ में खाने का सामान है तो बंदरों से बचकर रहें। जरा सा चूके तो हाथ का सामान बंदरों के झुंड के बीच में दिखता है। यह नजारा स्टेशन पर रोज ही दिखता है। सेंट्रल स्टेशन ही नहीं बल्कि शहर के कई व्यस्त सड़कें भी आवारा जानवरों की समस्या से जूझ रहे हैं। आवारा जानवर आए दिन हादसों की वजह बन रहे हैं। 1सेंट्रल स्टेशन के घंटाघर और कैंट साइड के प्लेटफार्म बंदरों के झुंड से पटे पड़े हैं। जीआरपी के सामने तो बंदरों की पूरी फौज ही दिखाई देती है। किसी भी यात्री का खाने का सामान छीन कर भाग जाना, आम बात हो गई है। खाद्य सामग्री पर झपट्टा मारकर बंदर शेड पर भाग जाते हैं या फिर प्लेटफार्म पर ही झुंड के रूप में खात जाते हैं। खौफ से न तो यात्री पास में जाते हैं न ही रेल कर्मी।

ऐसा ही हाल शहर की सड़कों का है। सर्दी के मौसम में जहां धूप दिखी वहीं दर्जनों की संख्या में आवारा जानवरों का झुंड सड़कों पर कब्जा कर लेता है। घंटाघर हो या हालसी रोड, हर तरफ इनका साम्राज्य नजर आता है। बीच सड़क जुगाली करने वाले जानवरों से आए दिन लोग टकराकर जख्मी हो रहे हैं। सब्जी मंडियों में तो इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है।

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