कानपुर का धनुष गणतंत्र की परेड में होगा शामिल

देश के पहले स्वदेशी टैंक धनुष की एक और उपलब्धि। कानपुर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री और फील्डगन फैक्ट्री में तैयार धनुष को पहली बार दुनिया देखेगी। थलसेना का हिस्सा बनने जा रहे धनुष के दो टैंक गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर अपने शौर्य का प्रदर्शन करेंगे। धनुष के शामिल होने से थलसेना की ताकत दुनिया के किसी भी देश के समकक्ष हो गई है। धनुष न सिर्फ बोफोर्स की जगह लेगा बल्कि स्वीडन की इस तोप से बहुत आगे है। इस बारे में ओएफसी के वरिष्ठ महाप्रबंधक नरेंद्र कुमार ने बताया कि टैंक का दीदार दुनिया कर सके इसलिए 26 जनवरी की परेड में धनुष को शामिल किया गया है।अभी तक नौ धनुष सेना को सौंपे जा चुके हैं। इस साल 17 धनुष का ऑर्डर दिया गया है। फरवरी से काम शुरू हो जाएगा। सेना को फिलहाल 474 धनुष की जरूरत है जिसे बोफोर्स से रीप्लेस किया जाएगा। बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए जल्द ओएफसी को बल्क प्रोडक्शन क्लीयरेंस मिल जाएगा। इसके बाद धनुष निर्माण की रफ्तार में तेजी आएगी। पांच तापमान में परखने के बाद स्वीकार किया धनुष : धनुष को बोफोर्स का स्थान देने से पहले सेना ने इसे देश में पांच विभिन्न तापमान वाले स्थानों पर महीनों परखा है। इटारसी, पोखरण, सिक्किम, लद्दाख और बालासोर में एक साल से परीक्षण चल रहा था। एक तरफ राजस्थान में 48 डिग्री सेल्सियस तापमान में धनुष खरा उतरा है तो दूसरी तरफ लद्दाख में माइनस 12 डिग्री तापमान में भी अपनी ताकत दिखाई है। लद्दाख में परीक्षण के लिए ओएफसी ने सेना को तीन तोपें दी थीं। यूं हुआ ‘धनुष’ का जन्म: 1987 में 400 तोपें भारतीय सेना ने आयात की थीं। बोफोर्स का बैरल छह मीटर लंबा है। वर्ष 2000 में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर ने बोफोर्स तोप का बैरल अपग्रेड करने का प्रस्ताव दिया और देश में पहली बार सात मीटर लंबा बैरल बनाया, जिसे 2004 में सेना ने स्वीकृत किया।

d146231760

 

Advertisements