ये एक लाख वोटर जिसके पक्ष में घूमा, उसी के सिर परबंधाजीत का ताज


kanpur

 


ये ऐसी विधानसभा है जहां सिर्फ करीब एक दर्जन बस्तियों के वोटर जिस कैंडीडेड के पक्ष में एकतरफा मतदान कर दिया वही यहां से चुनाव जीत जाता है।
कानपुर. शहर के वोटर ने वोट की चोट कर दी और अब नेता जीत हार की टोह लेने के लिए अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। लेकिन जिले की एक ऐसी विधानसभा है जहां सिर्फ करीब एक दर्जन बस्तियों के वोटर जिस कैंडीडेड के पक्ष में एकतरफा मतदान कर दिया वही यहां से चुनाव जीत जाता है। लगातार तीन बार इस सीट से अजय कपूर जीतते आ रहे हैं। 2012 के चुनाव में नए परसीमन के तौर पर किदवईनगर सीट अस्तित्व में आई और यह बस्तियां इसी के जुड़ गईं। जानकारों का मानना है कि यहां पर दिहाड़ी, मजदूर, रिक्शा चालक और फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारी रहते हैं। कांग्रेस विधायक अजय कपूर की इन पर सीधी पकड़ है। लेकिन पंद्रह सालों से यहां विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ और इसी के चलते इस बार मतदाता पंजे से खासा नाराज बताया जा रहा है।
इस बस्ती में 19,609 वोटर, 13 हजार मत पड़े
किदवई नगर की परमपुर बस्ती में अकेले करीब 19600 मतदाता हैं और 13 हजार लोगों ने वोट की चोट की है। 2012 के इलेक्शन में यहीं से अस्सी फीसदी वोट अजय कपूर को मिले थे और वह यहीं से जीते थे। परमपुर बस्ती के मतदाताओं के लिए नगर महापालिका श्री रतन शुक्ल इंटर कालेज के मतदान केंद्र बनाया गया। यहां पर 13 बूथ बनाए गए थे, इनमें से सिर्फ बूथ नंबर 11 में अधिकतम 65.44 तो बूथ नंबर छह में न्यूनतम 36.36 फीसद मतदान हुआ। जो मतदाताओं की उदासीनता का संकेत कर रहा है। परमपुर निवासी राजेश के मुताबिक यहां के मतदाता अजय कपूर को जिताते आ रहे हैं, लेकिन उन्होंने बस्ती के लिए कुछ नहीं किया। इस साल गंदगी के चलते डेंगू और मलेरिया ने दस्तक दी सैकड़ों लोग बीमार पडे पर विधायक जी ने सुध नहीं ली। इसी के चलते बस्ती का मतदान प्रतिशत कम हुआ।
70 हजार लोगों ने मत के जरिए की चोट
किदवईनगर विधानसभा क्षेत्र की लाल कॉलोनी, गोविंद नगर, राम आसरे नगर, रत्तू पुरवा, नटवन टोला, जूही बम्हुरहिया, उस्मानपुर, धरीपुरवा आदि बस्तियों में 70 हजार से अधिक मतदाता हैं जो हर साल निर्णायक साबित होते हैं। 2012 के चुनाव में यहां पर 54.32 फीसदी मतदान हुआ और जीत कांग्रेस के विधायक अजय कपूर के पक्ष में रही। तब उनका मुकाबला भाजपा के विवेकशील शुक्ल कर रहे थे जिन्हें हटाकर भाजपा ने इस बार महेश त्रिवेदी को प्रत्याशी बनाया। इस बार सपा कांग्रेस गठबंधन की तरफ से विधायक अजय कपूर फिर से मैदान में हैं। बसपा से संदीप शर्मा प्रत्याशी थे। इस बार के चुनाव में यहां पर 57.91 फीसद मतदान हुआ है। नौबस्ता निवासी रमेश चन्द्र बताते हैं कि इन बस्तियों में हिन्दू-मुस्लिम समाज की मिश्रित आबादी रहती है। विधायक अजय कपूर की इन पर अच्छी पकड़ थी लेकिन इस बार इन बस्तियों का वोट बपसा की तरफ मुड़ा है और कुछ भाजपा के महेश त्रिवेदी भी ले जाने में कामयाब रहे हैं। बोले, इस सीट पर अजय कपूर की हालत इस साल पतली है।
जीतेगा भाई जीतेगा का नहीं गूंजा नारा
किदवईनगर क्षेत्र की इन बस्तियों में इस बार के चुनाव जीतेगा भई जीतेगा का नारा गुम रहा। यहां तक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को बस्ती में लोगों ने घुसने तक नहीं दिया। उस्मानपुर बस्ती निवासी लियाकत और विलाल बेग ने बताया कि 2012 का चुनाव महज सात दिन के प्रचार के बल पर अजय कपूर को जिताया गया था। विलाल का कहना है कि हम लोग टोली बनाकर पहले के चुनाव में निरलते थे और फिर एक कैंडिडेट के पक्ष में मतदान की घोषणा हो जाया करती थी। पर 2017 के चुनावी दंगल बिलकुल शांत रहा। यहां के लोगों ने सभी कैंडीडेट्स से दूरियां मतदान के दिन तक बनाए रखीं। इसके अलावा मतदान प्रतिशत भी नहीं बढ़ा।
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