अखिलेश-मायावती की एक गलती… और निकल गया हाथ से यूपी

लखनऊ. गुरुवार को मतदान के ठीक बाद एग्जिट पोल से विचलित अखिलेश यादव ने एक इंटरव्यू में कहा कि जरूरत पड़ी तो बसपा का समर्थन लेने से वो गुरेज नहीं करेंगे। काश उन्होंने ये फैसला पहले ले लिया होता तो शायद चुनाव नतीजे की तस्वीर कुछ और ही होती, क्योंकि चुनाव परिणाम आज आ चुके हैं जो किसी की भी कल्पना से परे है।
भारतीय जनता पार्टी के असीम बहुमत का गणित लगाए तो एक हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आता है। वो ये कि यदि कांग्रेस, सपा और बसपा को मिले कुल वोटों को जोड़ दिया जाए तो वो बीजेपी को मिले वोट से ज्य़ादा साबित होता है। मतलब ये है कि यदि कांग्रेस-सपा गठबंधन को बसपा का साथ मिल जाता तो ये मुमकिन था कि नतीजे कुछ और ही होते और भाजपा को हार को मुंह देखना पड़ता।
सपा-बसपा-कांग्रेस का कुल वोट है 50 प्रतिशत-
भाजपा को मिले कुल वोटों की बात करें, तो शाम 4 बजे तक चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, यूपी चुनाव में पार्टी को सिर्फ 39.6 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं मायावती की बसपा को भले ही सबसे कम सीटें मिली हों, लेकिन बावजूद इसके वोट प्रतिशत मामले में वो दूसरे नंबर पर रही। पार्टी को 22 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं सपा को मामूली अंतर के चलते 21.9 फीसदी वोट मिले हैं। कांग्रेस ने 6.3 फीसदी वोट हासिल किए हैं। लेकिन वोट बंट जाने की कारण बीजेपी को अधिकांश सीटों पर जीत हासिल हुई है।
वहीं अगल बीएसपी, सपा और कांग्रेस का गठबंधन होता इसे कुल 50 फीसदी वोट मिलते और एक जगह होने के चलते भाजपा यूपी से बाहर ही होती।
बिहार में यहीं आंकड़ा आया काम-
बिहार चुनाव में लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और नीतिश कुमार की आरएलडी एक दूसरे के सामने थी। लेकिन भाजपा को बिहार में एंट्री न देने के मकसद से दोनों पार्टिय़ों ने कांग्रेस के साथ महागठबंधन कर लिया था। इसके चलते भाजपा को सर्वाधिक 24 प्रतिशत वोट तो मिले, लेकिन वो सीटों में तब्दील नहीं हो पाई। बिहार चुनाव 2015 में आरजेडी को 18, जेडीयू को 16 तो कांग्रेस को 6 फीसदी वोट मिले थे जिनके एक साथ होने की वजह से गठबंधन को 178 सीटें मिली और एनडीए को महज 58 सीटों से ही संतुष्ट होना पड़ा।
अब यदि इस आकड़े को अखिलेश और मायावती देखें, तो शायद उन्हें इस बात का अंदाजा हो जाए कि उनके फैसले कितने गलत साबित हो गए हैं।
 

पीएम मोदी के ये बयान जिन्‍होंने बदल दिए UP चुनाव के परिणाम

यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 23 रैलियां की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के कामकाज के बखान के साथ ही विपक्षी दलों पर खुलकर हमले किए। मोदी के कुछ ऐसे बयानों पर एक नजर जिन्होंने चुनाव की दिशा बदल दी।

4 फरवरी,  मेरठ 
भाजपा की लड़ाई स्कैम के खिलाफ लड़ाई है। स्कैम से मेरा मतलब है- एस समाजवादी, सी कांग्रेस, ए अखिलेश, एम मायावती। उत्तर प्रदेश तय करे। आपको स्कैम चाहिए कि भाजपा चाहिए।

5 फरवरी,  अलीगढ़
ये  लोग सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ही इकट्ठे नहीं आए हैं, ये इसलिए इकट्ठे आए हैं कि अगर मोदी का राज्यसभा में भी बहुमत हो गया तो मोदी ऐसे कानून बनाएगा कि चोर लुटेरों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। इसका डर है उन्हें।

8 फरवरी, गाजियाबाद 
जब 2019 का चुनाव आएगा तो मोदी आपको सामने से आकर पूरा हिसाब देगा। अभी तो उनकी बारी है जो यूपी में पहले से काबिज हैं। वो बतायें, उन्होंने उत्तर प्रदेश की भलाई के लिए क्या काम किया?

 10 फरवरी, बिजनौर 
मैं आपसे वादा करता हूं कि यूपी में सरकार बनते ही छोटे किसानों का कर्जा माफ करवाऊंगा। यूपी में भाजपा की सरकार बनते ही गन्ना किसानों को उनका बकाया पैसा दिया जाएगा।

 13 फरवरी, लखीमपुर 
अखिलेश सरकार का काम नहीं कारनामा बोलता है। आपकी पार्टी के दबंग लोगों के कारनामे बोलते हैं, आपकी पार्टी में गुंडागंर्दी करने वालों के पाप बोलते हैं। छत पर चढ़करके बोल रहे हैं।

 15 फरवरी, कन्नौज 
मुख्यमंत्री अखिलेश को अपने पिता पर हुआ हमला भी याद नहीं रहा। कुर्सी की मोह में आज उसी कांग्रेस के गोद में जाकर बैठ गए हैं जिसने उनके पिता की हत्या का षड्यंत्र रचा था।

 16 फरवरी, हरदोई 
मेरा जन्म गुजरात में हुआ, यूपी ने मुझे गोद लिया है। यूपी मेरा माईबाप है। मैं माईबाप को अकेले नहीं छोड़ूगा। भारी बहुमत से यूपी में बीजेपी की सरकार बनाइए। वादा है पांच साल के भीतर हर समस्या का हल खोजकर दूंगा।

  19 फरवरी, फतेहपुर  
अगर गांव में कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए। अगर रमजान में बिजली चाहिए तो दीवाली में भी होनी चाहिए। अगर होली में है तो ईद में भी होनी चाहिए। सरकार का काम है कि भेदभाव मुक्त शासन चले।

20 फरवरी, उरई

बुंदेलखंड में इतना बड़ा गड्ढा है कि उसे बाहर निकालने के लिए अकेले लखनऊ का इंजन काम नहीं आएगा।  उत्तरप्रदेश में बीजेपी का इंजन लगाना पड़ेगा और दिल्ली में भाजपा के प्रधानमंत्री का भी इंजन लगाना पड़ेगा, तब जाके बाहर आएगा भाइयों।

 21 फरवरी, फूलपुर (इलाहाबाद)

जो कांग्रेस यह कह रही थी कि 27 साल यूपी बेहाल वही आज बेहाल करने वालों के साथ है। कांग्रेस-सपा गठबंधन अवसरवादी गठबंधन है।

23 फरवरी, बहराइच  अखिलेश को गधे से भी डर लगने लगा क्या?  गधा अपने मालिक के प्रति वफादार होता है। मैं गधे से प्रेरणा लेता हूं और उससे ज्यादा काम करना चाहता हूं।

24 फरवरी, गोंडा

गोण्डा नेपाल से सटा है। कानपुर में रेल हादसा हुआ, उसमें सैकड़ों लोग मारे गए। उसमें कुछ लोग पकड़े गए हैं। यह हादसा षड़यंत्र के तहत हुआ। षड़यंत्र करने वाले सीमा पार बैठे हैं।

27 फरवरी,  मऊ  यहां का बाहुबली मुस्कुराते हुए जेल जाता है, क्योंकि यहां जेल से ही गैंग चलता है। देखते हैं 11 मार्च के बाद जेलों में कैसे रंगीनियत रहती है। एक फिल्म आई थी बाहुबली जिसमें नायक सुधार करता है। हम कानून की छड़ी से सब सही करेंगे।

1 मार्च, महाराजगंज
नोटबंदी की घोषणा के दिन से ही विपक्षी नेता कहने लगे कि उद्योग बंद हो गए। देश पिछड़ गया। जीडीपी दर घटने के दावे किए। पर देश के मजदूरों, किसानों और जवानों ने दिखा दिया कि हार्वर्ड वालों से ज्यादा दम हार्ड वर्क वालों में है।

3 मार्च,  मिर्जापुर में 
जब यूपी के भ्रष्टाचार को सुनता हूं तो मुझे अशोक चक्रधर की कविता याद आती है। उन्होंने चार प्रकार के भ्रष्टाचार बताए नजराना, शुकराना, हकराना और जबराना। अब आपके पास एक प्रकार है हराना, सपा-बसपा-कांग्रेस को हराना।

5 मार्च, वाराणसी 
सपा हो, बसपा हो या कांग्रेस। उनकी रगों में यही विचार दौड़ता है कुछ का साथ, कुछ का विकास। हम कहते हैं सबका साथ, सबका विकास। विकास में भेदभाव नहीं चलता है।

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