विश्लेषण : बिठूर विधानसभा सीट

सांगा संग भाजपा में गए कांग्रेस के वोटर

कानपुर : 2012 के चुनाव में बिठूर विधानसभा सीट पर भाजपा की जमानत जब्त हो गई थी। इस चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से आए अभिजीत सिंह सांगा को मैदान में उतारा और पिछले चुनाव में भाजपा की जमानत जब्त कराने वाले मुनींद्र शुक्ला को बुरी तरह से हराया। 2012 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़े सांगा ने 51822 वोट झटके थे अब वे भाजपा में आए तो वे वोटर भी उनके साथ आ गए जिन्होंने कांग्रेस में रहते उनका साथ दिया था।

2012 के चुनाव में सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच दिलचस्प मुकाबला हुआ था। भाजपा के दिनेश अवस्थी इस मुकाबले में दूर-दूर तक नहीं थे। उनकी स्थिति तो यह थी कि वे अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे। अभिजीत सांगा ने तब कांग्रेस से लड़कर मुकाबले को इतना रोचक बनाया कि सपा के मुनींद्र शुक्ल बसपा के आरपी कुशवाहा से 671 वोटों से जीते। तब मुनींद्र को 61081 वोट मिले थे। इस चुनाव में मुनींद्र को उम्मीद थी कि वे 2012 की जीत को दोहरा लेंगे, लेकिन उनका सपना टूट गया। सपा के आला नेताओं की आपसी कलह भी यहां मुनींद्र की हार का कारण बनी। यहां पार्टी के नेता अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के खेमे में बंटे नजर आए। मुनींद्र को शिवपाल खेमे का माना जाता है। अगर मुनींद्र के हिस्से में कांग्रेस के मतदाता आते तो वे जीत जाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि अभिजीत सांगा के भाजपा में आते ही कांग्रेस के मतदाता भी भाजपा में चले गए और भाजपा जीती। बसपा के आरपी कुशवाहा इस बार पार्टी के परंपरागत मतदाताओं को साधने के बजाय सोशल इंजीनिय¨रग के फार्मूले पर मैदान मारने की कोशिश में लगे थे यही उनकी गलती उन पर भारी पड़ी और वे पिछले चुनाव में मिले वोट के आंकड़े को भी नहीं छू सके।

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