उर्सला में मरीजों की जान से खिलवाड़

कानपुर (उर्सला)। जिला अस्पताल उर्सला में आने वाले गंभीर मरीजों की जान बच जाएगी इसकी कोई गारंटी नही है। दरअसल इमरजेंसी में स्थित वेंटीलेटर यूनिट में 12 में 6 वेंटीलेटर लंबे समय से खराब पड़े हैं। वहीं इसमें उपयोगी 15 मानीटर भी ठप हो गये हैं। केवल तीन मानीटर से छह वेंटीलेटर किसी तरह चलाये जा रहे हैं। इन हालात में वेंटीलेटर खाली न होने पर गंभीर मरीजों को हैलट रेफर किया जा रहा है। उर्सला में बसपा शासनकाल में वेंटीलेटर यूनिट की स्थापना हुई थी। 12 बिस्तर क्षमता वाली यूनिट को 12 वेंटीलेटर मिले थे। लेकिन इसके संचालन के लिए अलग से टेक्नीशियन व विशेषज्ञों की भर्ती नही हुई। लिहाजा मौजूद स्टाफ से अभी तक काम चलाया जा रहा है। सपा शासनकाल के दौरान 12 में 6 वेंटीलेटर खराब हो गये। इसके साथ 15 मानीटरों में भी तकनीकी खराब आ गयी है। केवल तीन मानीटर से छह वेंटीलेटर चलाये जा रहे हैं।

हैलट में अब कंप्यूटराइज मृत्यु प्रमाण पत्र बनेंगे

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के हैलट अस्पताल में अब कंप्यूटराइज मृत्यु प्रमाण पत्र बनेंगे। अस्पताल के इनडोर भवन में स्थित फाम्रेसिस्ट हाल के एक हिस्से में इस कार्य के लिए अलग कक्ष तैयार किया जाएगा। शुक्रवार से यहां पर काम चालू भी हो जाएगा। अभी तक अस्पताल में मरीजों की मृत्यु होने की दशा में मैनुअल मृत्यु प्रमाण पत्र बनते हैं। मेडिकल कालेज के हैलट अस्पताल की इमरजेंसी मे रोजाना 30 से 35 नये मरीज भर्ती होते हैं। जबकि रोजाना इलाज के दौरान तीन से चार मरीजों की जानें जाती हैं। मरीज के मरने की सूरत में अस्पताल मैनुअल मृत्य प्रमाण पत्र बनाकर देता है। परिजन इस प्रमाण को लेकर नगर निगम में जमा करते हैं, इसके आधार पर नगर निगम कंप्यूटराइज मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करता है। नयी व्यवस्था के तहत अब यहां कंप्यूटर पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनेंगे। प्राचार्य डा. नवनीत कुमार ने बताया, इनडोर भवन में फाम्रेसिस्ट हॉल के आठ बाई बारह फिट साइज में एल्युमिनियम वर्क से नयी केबिन तैयार की जाएगी। इस पर काम चालू भी हो गया है। शुक्रवार से नयी व्यवस्था लागू भी हो जाएगी। लेखाधिकारी सुनील बाजपेयी ने बताया, अस्पताल में मृत्यु प्रमाण पत्र आनलाइन होने से नगर निगम को फाइनल प्रमाण पत्र जारी करने मे सहूलियत होगी। इसके अलावा मेडिकल कालेज के अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज जच्चा बच्चा अस्पताल जीटी रोड में जन्म लेने वाले बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र पहले से कंप्यूटर पर बन रहे हैं।

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