उत्तर प्रदेश में पशुओं की संख्या पिछले पांच सालों में 14 फीसद बढ़ी है

उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, गुजरात और असम जैसे राज्यों में पशुओं की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इन राज्यों में दूध देने वाले पशुओं की संख्या बढ़ी है।

उत्तर प्रदेश में पशुओं की संख्या पिछले पांच सालों में 14 फीसद बढ़ी है। जबकि गुजरात में यह वृद्धि 15 फीसद तक रही है। हालांकि पशुओं की कुल संख्या में 3.33 फीसद की कमी दर्ज की गई है, जिसे सरकार की नजर में बहुत अधिक नहीं है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, गुजरात और असम जैसे राज्यों में पशुओं की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इन राज्यों में दूध देने वाले पशुओं की संख्या बढ़ी है। जबकि बैलों की घटती उपयोगिता के चलते इनकी संख्या में कमी जरूर दर्ज की गई है।
विश्व के सर्वाधिक मवेशियों वाले देश भारत में पशुओं की संख्या में कोई खास गिरावट नहीं आई है। देश में पशु गणना प्रत्येक पांच साल बाद होती है। वर्ष 2007 और 2012 के बीच पशुओं की संख्या में केवल 3.33 फीसद की कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी शुक्रवार को राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने एक सवाल के जवाब में दी।
उन्होंने बताया कि गुजरात में पशुधन की संख्या इन पांच सालों में 15 फीसद बढ़ी है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह वृद्धि दर 14 फीसद रही है। असम में यह नौ फीसद और बिहार में 8 फीसद की दर से बढ़ी है। हालांकि तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और गोवा में पशुओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन गति धीमी है। देश में फिलहाल कुल 51.2 करोड़ पशुधन हैं।
प्रत्येक पांच साल में एक बार होने वाली पिछली पशु गणना वर्ष 2012 में हुई थी। इनमें जिन पशुओं की गणना की जाती है, उनमें भैंस, गोवंश, भेंड़-बकरी, सूअर, घोड़े, गदहे, खच्चर, मिथुन और याक प्रमुख हैं।

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