नीचे दुकान और ऊपर मकान, मौत से बेखबर लाखों की जान

कानपुर। न उन्हें फुर्सत है और न इन्हें फिक्र, दोनों तरफ दौलत कमाने की लगी है होड़। चकेरी जैसी घटना होने के बाद सरकारी अफसर आग में पानी डालकर खामोस हैं। लेकिन इनके चलते लाखों जिंदगियां मौत के मुहाने पर खड़ी हैं। शहर की एक दर्जन तंग गलियां और बाजार, उसमें सैकड़ों मकान और नीचे दुकान के साथ ही गोदाम चल रहे हैं। दुकानों में खतरनाक कारोबार होता है, वहीं ऊपर कई-कई मंजिल तक लोग रहते हैं। कई ऐसे बाजार हैं जहां जारा सी चिंगारी हजारों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल सकती है। बतादें पिछले सप्ताह एक कारोबारी के घर में आग लग गई थी। थी। कारोबारी ने घर पर ही साड़ियों का गोदाम बना रखा था और आग की चपेट में साड़ियां आ गई, जिसके चलते वो बाहर नहीं निकल पाए और चार लोगों की जलकर मौत हो गई थी।
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10 हजार दुकानें के ऊपर बने मकान
कानपुर का जनरलगंज इलाके में दस हजार से ज्यादा छोटे और बड़े कपड़े के शोरूम के साथ हजारों ट्रक साड़ियों व अन्य कपड़ों की दुकानों व गोदाम तंग गलियों में बने हैं। इन दुकानों के ऊपर ही कई मंजिल मकानों में लोग रहते हैं। इसमें से खतरनाक बात ये है कि इनमें से अघिकांश मकानों का एक ही जीना है और इसी बाजार के अंदर खुलता है। यहां कई बार आग लग चुकी है, लेकिन दमकल की गाड़ियां एक किमी दूर मुख्य मार्ग पर खड़ी होती हैं और फिर वहां से पाइप जोड़कर घटनास्थल तक फायरबिग्रेड के जवान पानी पहुंचाते हैं। कभी-कभी पाइप लाइन जोड़ने में ही इतना समय लग जाता है कि सब कुछ राख हो जाता है।
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फैला है बिजली के तारों का जाल
मेस्टनरोड स्थित प्लास्टिक, बिजली मार्केट, रेडीमेट मार्केट है। इस मार्केट में बिजली के तारों का जंजाल कभी भी शोले भड़का सकता है। पीरोड बाजार का भी यही हाल है, यहां हजारों की संख्या में पकड़े की दुकानें हैं। साथ ही सड़क पर भी सैकड़ों छोटी-छेटी दुकाने चल रही हैं। अगर यहां पर आग लग जाए तो बच निकलने का कोई रास्ता नहीं है। बजरिया थाने से लेकरक जरीब चौकी तक फैले इस बाजार में नीचे दुकानें और ऊपर मकान हैं और घरों पर कारोबारियों ने गोदाम बना रखा है। समाजसेवी अभिनव गुप्ता बताते हैं कि दस साल पहले यहां पर भीषण आग लगी थी, पांच लोग की झुलसकर मौत हुई थी, बावजूद शासन-प्रशासन ने इस पर आज तक ध्यान नहीं दिया।
इन बजारों में छह-छह मंजिला कमान
ऐसे ही हाल बेगमगंज बाजार का है। यहां पर लोग छह-छह मंजिला मकान में रह रहे हैं, वहीं नीचे कपड़े के ससथ अन्य कारोबार चल रहे हैं। कईबार यहां आग की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन दमकल की गाड़ियां एक बार भी बाजार के अंदर नहीं पहुंच सकीं। रूहर के शिवाला, मेस्टनरोड, खिलौना बाजार, लाल बंगला सहित एक दर्जन से ज्यादा बाजारों का हाल है, जहां लोग दुकानों के ऊपर लोग रह रहे हैं। इसमें अगर अनहोनी हो जाए तो लोग क्या करेंगे, ये सवाल बना हुआ है। वहीं आमशहरी का कहना है कि दुकानों के ऊपर रिहायश हे। वहां नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसे देखने वाला कोई नहीं है। पूर्व अग्न्शियन अधिकारी अफसर खान ने बताया कि यह नगर निगम को देखना चाहिए कि दुकान के ऊपर कितनी ऊंचाई पर मकान बना है। ऐसे मकानों को उसे चिन्हित कर नोटिस देनी चाहिए।
क्या बोले जिम्मेदार
केडीए के मुख्य नगर नियोजन अधिकारी आशीष शिवपुरी ने बताया कि जहां गैदरिंग होती है वहां प्रवेश और निकास द्धार की जरूरत होती है। 15 मीटर से ऊपर के भवन में फायर विभाग की एनओसी की जरूरत पड़ती है। इससे नीचे में भवन स्वामी अपनी जरूरत के हिसाब से प्रवेश व निकास के रास्ते तय करता है। वहीं फायर अधिकारी पीआर सरोज ने बताया कि मकान की ऊंचाई 15 मीटर व कवर्ड एरिया 500 मीटर से कम होने पर भवनों के लिए एनओसी का प्रावधान है। यह सबंधित विभाग को देखना होगा कि नक्शे से अलग निर्माण पर वे नोटिस भेजें।
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