2000 जीर्णशीर्ण मकानों में रहने वाले बेपरवाह

कानपुर प्रमुख संवाददाता चमनगंज के तकिया पार्क में ढहे जर्जर मकान के बाद हजारों लोग दहशत में आ गए हैं। उन्हें डर है कि कहीं वे भी हादसे का शिकार न हो जाएं। इसके साथ ही रुक-रुककर हो रही बरसात और कहर बरपा रही है। शहर के दो हजार जर्जर मकानों में रहने वाली आबादी सहमी तो है पर इनमें से कोई भी आशियाना छोड़ने को तैयार नहीं है। सबसे ज्यादा जर्जर मकानों की संख्या नगर निगम जोन-1 में है इसलिए यहां अब तक 350 जर्जर मकान मालिकों को नोटिस दिया गया है। यहां ईंटें गिर रही हैं पर किराए में रहने वाले लोग कहीं और जाने को तैयार नहीं हैं। जर्जर इमारत होने के बावजूद पुलिस बादशाही नाका थाना छोड़ने को तैयार नहीं है। थाने का एक तरफ का हिस्सा गिरने लगा है। जर्जर भवन ने अगल-बगल के आधा दर्जन मकानों में भी दरारें पैदा कर दी हैं। कानपुर में ज्यादातर जर्जर मकान नौघड़ा, भाटन वाली गली नौघड़ा, बादशाही नाका, हालसी रोड, जनरलगंज, लाठी मोहाल, कुली बाजार, कंघी मोहाल, तकिया पार्क, प्रेम नगर में हैं। इसमें अधितकर क्षेत्र नगर निगम के जोन-1 के अंर्तगत आते हैं। 20 सालों में नगर निगम ने शहर में दो हजार जर्जर मकान चिह्न्ति किए हैं। एक साल में 324 जर्जर घरों की सूची बनाई है पर कोई भी मकान वह गिराने में नाकाम रहा।

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