गाजियाबाद से कानपुर का सफर और जल्दी होगा पूरा

कानपुर : गाजियाबाद से कानपुर तक का रेल सफर का समय आने वाले दिनों में और कम हो जाएगा। इस रूट को केंद्रीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत पनकी और टूंडला रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक सिग्नल प्रणाली के कंट्रोल रूम बनाकर पूरे रूट को एक क्लिक पर समेटा जा रहा है। गाजियाबाद से कानपुर तक आने में एक एक्सप्रेस ट्रेन को करीब पांच से छह घंटे का समय लगता है लेकिन कभी-कभी ऐसी ट्रेनें सात घंटे तक ले लेती हैं। यही नहीं, पनकी से कानपुर पहुंचने में कई गाड़ियां दो से ढाई घंटे का समय लेती हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण पुराने जमाने की सिग्नल प्रणाली है। इलेक्ट्रो मैकेनिकल इंटरलॉकिंग सिस्टम में एक गाड़ी के बाद लगातार दूसरी गाड़ी को सिग्नल देने में पांच से सात मिनट का समय लगता है।


कानपुर: मेट्रो रेल का संशोधित डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी केडीए ने राइट्स कंपनी को दी है। पहले भी राइट्स कंपनी ने खाका तैयार किया था। दिसंबर तक डीपीआर तैयार करके शासन को भेजना है। वहीं पॉलीटेक्निक में बन रहा यार्ड का काम रुक गया है। 1पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत मेट्रो रेल का निर्माण होना है। इसके लिए नए सिरे से संशोधित डीपीआर तैयार कराया जा रहा है। केडीए को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है। केडीए बोर्ड बैठक ने स्वीकृति भी दे दी है। 1 दिसंबर माह तक डीपीआर तैयार करके शासन को भेजा है। इसको तैयार होने वाला खर्च केडीए वाहन करेगा। वहीं पॉलीटेक्निक में 24 डिपो का बन रहा यार्ड का काम पिछले दिनों रुक गया है। डीपीआर स्वीकृति के बाद ही धन की व्यवस्था होगी। चार अक्टूबर 2016 को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिलान्यास किया था लेकिन अभी तक मात्र 40 फीसद ही काम हो पाया है। डीपीआर तैयार होकर शासन को भेजा जाएगा फिर यहां से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। वहीं अगले हफ्ते पॉलीटेक्निक भवन के निर्माण के लिए आइटीआइ में भूमि देने को लेकर शासन स्तर पर बैठक होनी है।जागरण संवाददाता, कानपुर: मेट्रो रेल का संशोधित डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी केडीए ने राइट्स कंपनी को दी है। पहले भी राइट्स कंपनी ने खाका तैयार किया था। दिसंबर तक डीपीआर तैयार करके शासन को भेजना है। वहीं पॉलीटेक्निक में बन रहा यार्ड का काम रुक गया है। 1पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत मेट्रो रेल का निर्माण होना है। इसके लिए नए सिरे से संशोधित डीपीआर तैयार कराया जा रहा है। केडीए को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है। केडीए बोर्ड बैठक ने स्वीकृति भी दे दी है। 1 दिसंबर माह तक डीपीआर तैयार करके शासन को भेजा है। इसको तैयार होने वाला खर्च केडीए वाहन करेगा। वहीं पॉलीटेक्निक में 24 डिपो का बन रहा यार्ड का काम पिछले दिनों रुक गया है। डीपीआर स्वीकृति के बाद ही धन की व्यवस्था होगी। चार अक्टूबर 2016 को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिलान्यास किया था लेकिन अभी तक मात्र 40 फीसद ही काम हो पाया है। डीपीआर तैयार होकर शासन को भेजा जाएगा फिर यहां से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। वहीं अगले हफ्ते पॉलीटेक्निक भवन के निर्माण के लिए आइटीआइ में भूमि देने को लेकर शासन स्तर पर बैठक होनी है।

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