885 करोड़ में बना सुप्रीम कोर्ट का सबसे आधुनिक भवन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग का उद्‌घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नई इमारत अनूठी है, क्योंकि यह सौर उर्जा, पर्यावरण और जलसंरक्षण की खासियत अपने अंदर समेटे हुए है। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे।

12.19 एकड़ में बनी इस बिल्डिंग को सुरंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट की पुरानी बिल्डिंग से जोड़ा गया है। इस पर 885 करोड़ रुपए का खर्च आया है। सुप्रीम कोर्ट का सारा प्रशासनिक काम, मुकदमों की फाइलिंग, कोर्ट के आदेशों और फैसलों की कापियां लेने आदि सभी काम पुरानी बिल्डिंग से इस नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो जाएगा। पर अदालतें पुरानी बिल्डिंग में ही लगेंगी।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले 9 भाषाओं में: इस मौके पर राष्ट्रपति कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के 9 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद की शुरू होने वाली सुविधा का अनावरण भी किया। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि अब सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी होंगे। ये फैसले सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी अपलोड किए जाएंगे।

नए भवन में प्रशासनिक कामकाज और रजिस्ट्री होगी, अदालतें पुरानी बिल्डिंग में ही रहेंगी

  •  नई इमारत में सुप्रीम कोर्ट की सभी फाइलों का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। इसके लिए एक आईटी सेल भी बनाया गया है। सुरक्षा के लिहाज से पूरी इमारत में 825 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।
  •  पुरानी से नई बिल्डिंग तक जाने के लिए तीन भूमिगत रास्ते हैं जिसमें से एक रास्ता जजों के लिए, दूसरा सुप्रीम कोर्ट रिकार्ड के लाने ले जाने के लिए और तीसरा रास्ता वकीलों के लिए है।
  •  1 लाख लीटर क्षमता का रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट भी लगा है, जो बरसाती जल को जमा करेगा। दो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं। ये सीवेज वॉटर को पीने योग्य बनाएंगे।
  •  भवन निर्माण में 20 लाख डिमोलीशन वेस्ट के ब्लॉक लगाए गए हैं। पहली बार देश में किसी बिल्डिंग में इतनी अधिक मलबे का इस्तेमाल हुआ है। 1800 कारों की पार्किंग क्षमता है।

aaबिजली की 40% जरूरत सौर ऊर्जा से पूरी होगी 

  • नई इमारत : इमारत में सेंट्रलाइज्ड एसी है। यह 5 ब्लॉक में है। ज्यूडिशरी ब्लॉक, लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम है। बिजली की 40% जरूरत सौर ऊर्जा से पूरी होगी।
  • ऑडिटोरियम : 650 और 250 लोगों की क्षमता वाले दो विश्व स्तरीय आॅडिटोरियम, एक मीटिंग रूम और एक बड़ा राउंड टेबल कांफ्रेंस रूम बनाया गया है।
  • एंट्रेंस लॉबी: तस्वीर ज्यूडिशियल ब्लॉक के एंट्रेंस लॉबी की। इमारत सेंसर बेस्ड एलईडी लाइटिंग से लैस है। किसी के नहीं होने पर लाइट खुद बंद हो जाएगी

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट को संवैधानिक मूल्यों का पहरेदार बताते हुए कहा कि कई बार ऐसे मौके आये जब सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचने से टाला है। अभी यह सब बताने का अवसर नहीं है बस इतना कहना पर्याप्त होगा कि न्याय की पुकार के प्रति इस संस्था की प्रतिबद्धता कभी कम नहीं होगी उससे कोई समझौता नहीं होगा। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट हमेशा चौबीसों घंटे पूरे साल तत्पर रहता है और रहेगा।

पर्यावरण अनुकूल सोलर एनर्जी से लैस है सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग
सुप्रीम कोर्ट की नयी इमारत मे बहुत सी खूबियां हैं। यहां बिजली की 40 फीसद जरूरत सौर ऊर्जा से पूरी होगी। 1800 कारों की क्षमता की तीन स्तरीय पार्किग है। यहां सुप्रीम कोर्ट का रिर्काड रूम, लाइब्रेरी, वकीलों के चैम्बर के अलावा आडिटोरियम और मल्टीपरपस हाल है। हालांकि अदालतें पुरानी बिल्डिंग में ही लगेंगी। नयी बिल्डिंग से पुरानी बिल्डिंग तक जाने के लिए तीन भूमिगत रास्ते हैं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हिन्दी सहित नौ प्रादेशिक भाषाओं में फैसले उपलब्ध कराने पर सुप्रीम कोर्ट की सराहना की है। राष्ट्रपति ने प्रादेशिक भाषाओं में अनुवादित 100 फैसलों का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रादेशिक भाषाओं में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले उपलब्ध हों यह उनकी दिली इच्छा थी।

प्रादेशिक भाषाओं में फैसले उपलब्ध होने से जिन लोगों को अंग्रेजी नहीं आती वे लोग भी फैसले समझ सकेंगे। यह सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के ज्यादा से ज्यादा फैसले प्रादेशिक भाषाओं में उपलब्ध हों।

राष्ट्रपति ने ये बात बुधवार को प्रगति मैदान स्थित सुप्रीम कोर्ट की नयी बिल्डिंग का उद्घाटन करने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पहले जिन लोगों को अंग्रेजी समझ नहीं आती थी वे फैसला समझने के लिए वकील के पास जाते थे और उन्हें उसकी फीस देनी होती थी।

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