ट्रीटमेंट में लापरवाही और लेटलेतीफी पड़ रही जान पर भारी

ट्रीटमेंट में लापरवाही और लेटलेतीफी पड़ रही जान पर भारी

ट्रीटमेंट में लापरवाही और लेटलेतीफी पड़ रही जान पर भारी

  1. -एंबुलेंस, एडमिट करने आदि में लापरवाहियों की वजह से भी जा रही है कोरोना पेशेंट्स की जान
  2. – एलएलआर हॉस्पिटल में प्रदेश के किसी भी दूसरे कोविड हॉस्पिटल के मुकाबले सबसे ज्यादा डेथ
  3. कोरोना से मौतों के मामले में कानपुर यूपी में नंबर वन है और एक्टिव पेशेंट में नंबर दो पर।
  4. बीते 10 दिनों में ही 44 पेशेंट्स की मौत हो चुकी है। जबकि इन 10 दिनों में पूरे शहर में कुल 82 पेशेंट्स की कोरोना से मौत हुई
  5. हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर कैपिसिटी को डबल किया गया, लेकिन लेटलतीफी, लापरवाही एक्सप‌र्ट्स कमी सहित कई और वजहें भी हैं जिनके कारण कोरोना से मौत के मामले में अस्पताल नंबर-1 बना हुआ है।इनमें सुधार करने के साथ संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी जरूरी है।

एंबुलेंस में नहीं मिल रही ऑक्सीजन

नौबस्ता के एक बैंक आफिसर कोरोना पॉजिटिव निकले। उन्होने व फैमिली मेंबर्स ने एंबुलेस के सीएमओ आफिस से लेकर कन्ट्रोल रूम तक फोन किए, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसबीच उनकी हालत और खराब हो गई। यशोदा नगर निवासी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। एंबुलेंस के लिए सीएमओ ऑफिस, सोशल मीडिया ही नहीं सत्ताधारी दल के नेताओं के जरिए प्रयास किए लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। कई बार प्राइवेट हॉस्पिटल में किसी पेशेंट के कोरोना पॉजिटिव निकलने पर उसे नार्मल एंबुलेंस में या कई मरीज को उसके अपने साधन से ही एलएलआर हॉस्पिटल रेफर कर दिया जाता है। इस दौरान पेशेंट को एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं मिलने और भर्ती होने में वक्त ज्यादा लगने से उसकी हालत क्रिटिकल हो जाती है।

एडमिट करने में लापरवाही

राजधानी एक्सप्रेस के ड्राइवर कोरोना पाजिटिव निकले तो वह खुद ही एडमिट होने के लिए कांशीराम हॉस्पिटल पहुंच गए। एडमिट न होने पर हैलट भी आए। लेकिन सफलता नहीं मिली। इसबीच उनकी तबियत काफी खराब हो गई। दो दिन बाद जैसे-तैसे हैलट में एडमिट किए, लेकिन 24 घंटे में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इसी तरह बर्रा की कोरोना पाजिटिव महिला को एडमिट करने के लिए कोविड हास्पिटल के बाहर रोके रखा गया। जबकि होल्डिंग एरिया में मौजूद डाक्टर ने उनकी हालत खराब होने की भी जानकारी दी। आखिरकार महिला ने दम तोड़ दिया।

क्रिटिकल हालत में पहुंच रहे

टर्सरी केयर सेंटर होने की वजह से यहां आने वाले पेशेंट्स की हालत पहले की काफी क्रिटिकल होती है। पेशेंट की कोविड रिपोर्ट आने तक उसे होल्डिंग एरिया में रखा जाता है। रिपोर्ट आने के बाद उसे कोविड हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जाता है। इस दौरान पेशेंट की हालत ओर बिगड़ जाती है और अक्सर उसकी मौत भी हो जाती है।

स्वास्थ्य विभाग से नहीं कोआर्डिनेशन

क्रिटिकल कोरोना पेशेंट्स को आइसोलेट करने के लिए एलएलआर हॉस्पिटल और हेल्थ डिपार्टमेंट के बीच कोऑर्डिनेशन नहीं है। जबकि क्रिटिकल पेशेंट्स को जल्द से जल्द सक्षम फैसेलिटी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। इस दौरान कई बार प्राइवेट अस्पताल भी बिना स्वास्थ्य विभाग को सूचना दिए, पेशेंट को सीधे हैलट भेज देते हैं। ट्यूजडे को आर्यनगर स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल ने यही किया। जिसकी वजह से कई घंटों तक चक्कर काटने के बाद कोरोना पेशेंट की मौत हो गई।

सीनियर फैकल्टी का कम विजिट करना

एलएलआर हॉस्पिटल के न्यूरो साइंस सेंटर में अब 100 बेड की क्रिटिकल केयर फैसेलिटी को शुरू किया गया है। दो नए सीनियर एनेस्थीसिया कंसल्टेंट भी आए हैं। इस बीच कई बार क्रिटिकल केयर में आर्थोपेडिक डॉक्टर्स, सर्जन, न्यूरो सर्जन की यूनिट में पेशेंट भर्ती किए जाते हैं। जिनकी क्रिटिकल केयर में विशेषज्ञता नहीं होती। सीनियर फैकल्टी का आईसीयू में कम विजिट करने जैसी शिकायतें भी बराबर मिलती हैं। प्रमुख सचिव स्वास्थ ने इसको लेकर चेतावनी दी थी।

———————————————————————————————–

[फैक्ट फाइल-]

82- पेशेंट्स की डेथ हुई बीते 10 दिनों में कानपुर में कोरोना से

44- पेशेंट्स की डेथ इस दौरान सिर्फ एलएलआर हॉस्पिटल में

190-डेथ कानपुर में हो चुकी हैं सिर्फ अगस्त महीने में अब तक

391- टोटल पेशेंट्स की मौत हो चुकी कानपुर में कोरोना से

2.96- परसेंट कानपुर में कोविड पेशेंट्स का मार्टेलिटी रेट

71.84- परसेंट कोविड पेशेंट्स का मॉर्टेलिटी रेट कानपुर में


वर्जन-

सीमित पैरामेडिकल और आईसीयू स्टाफ के बाद भी हमारे रेजीडेंट्स और कंसल्टेंट दिन-रात काम कर रहे हैं। बड़ी संख्या में कोविड पेशेंट्स आईसीयू से ठीक होकर निकले हैं। हर क्रिटिकल पेशेंट की जान बचाने के पूरे प्रयास किए जाते हैं। लगातार ड्यूटी की वजह से हमारे कई रेजीडेंट्स भी कोरोना की चपेट में आए हैं।


%d bloggers like this: