कानपुर, मेरठ और आगरा में मेट्रो चलाने पर 43 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे

बुधवार को कैबिनेट की बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। उत्तरप्रदेश में कानपुर, मेरठ और आगरा में मेट्रो चलाने पर 43 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा योगी सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से शहरों के भीतर चलने वाले स्लॉटर हाउस पर भी लगाम लगाने का प्रयास किया है।…

आईआईटी से नौबस्ता तक मेट्रो के 22 स्टेशन

कानपुर में मेट्रो ट्रैक के दोनों तरफ होगी सात-सात मीटर चौड़ी रोड

कानपुर : मेट्रो ट्रैक के दोनों तरफ सात-सात मीटर की चौड़ी रोड होगी। डिवाइडर के बीच से अगल-बगल तक तीन मीटर का हिस्सा मेट्रो का ट्रैक बनाने के लिए घेरा जाएगा। जहां सात मीटर चौड़ी रोड नहीं मिलेगी वहां कानपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ही बाकी बची जगह पर चौड़ीकरण कराएगा। आईआईटी से मोतीझील तक एलीवेटेड…

कानपुर में मेट्रो के एसपीवी को राज्यपाल की मंजूरी

कानपुर : कानपुर में मेट्रो प्रोजेक्ट की राह की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। अभी तक कानपुर मेट्रो रेल कारपोरेशन के एसपीवी (स्पेशल परपज व्हीकल) को मंजूरी न मिल पाने के कारण प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने में दिक्कत आ रही थी। अब राज्यपाल राम नाईक ने एसपीवी के गठन को हरी झंडी…

स्मार्ट सिटी बोर्ड की पहली बैठक

वीआईपी रोड पर बनेगा अपरगामी पुल,महानगर का जलापूर्ति और सीवेज सिस्टम सुधारने पर भी जोर ,मंडलायुक्त ने कहा विकास कार्य ऐसे हों कि जनता सराहना करेमेट्रो रेल परियोजना के निर्माण कार्य में भी तेजी लाने के निर्देश

नई सरकार से शहर में जागी मेट्रो की आस

कानपुर : छह माह से मेट्रो यार्ड से ही बाहर नहीं निकल पा रही है। 13721 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में अभी तक पचास करोड़ रुपये से केवल दिखावा मात्र यार्ड का निर्माण कराया जा रहा है और यह काम भी कई दिन से रुका पड़ा है। केंद्र व प्रदेश में अब एक ही दल…

मेट्रो रेल की राह में रोड़ा बनी मिट्टी

कानपुर : शहर में मेट्रो रेल की राह में बजट के साथ अब मिट्टी भी आड़े आ रही है। पालीटेक्निक में यार्ड बनाने के लिए चार लाख घनमीटर मिट्टी की जरूरत है। इतनी मिट्टी एकत्र करने के लिए अफसरों का पसीना छूटने लगा है। लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन ने मिट्टी के लिए जिला प्रशासन व…

कनपुरियों से पीएम ने दागे 10 सवाल, मैनचेस्टर पर कुछ नहीं बोले

परिवर्तन रैली में लाखों की भीड़ देख गदगद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी से लेकर मौजूद लोगों से दस सवाल दागे, पर मैनचेस्टर के तमगे के बारे में एक शब्द नहीं बोले। इससे वहां पीएम को सुनने आए लोग दुखी हुए। केमिकल कारोबार राहुल बजाज ने कहा कि पीएम से उम्मीद थी की वह शहर की बंद पड़ी मिलों को चालू कराए जाने को लेकर कुछ कहेंगे, लेकिन वह सिर्फ नोटबंदी पर सफाई देकर निकल लिए।

सिस्टम और राजनीति के रेड सिग्नल पर खड़ी कानपुर मेट्रो को कब ग्रीन सिग्नल मिलेगा

वैसे तो कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के लिए निर्माण शुरू तो हो गया है मगर यह आशंका गहराने लगी है कि आगामी विधान सभा चुनाव के दंगल में यह प्रोजेक्ट न पिस जाए। अब कभी भी आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है। ऐसे में अगले छह माह तक इस मेट्रो के लिए कोई धनराशि शायद ही स्वीकृत हो पाए।

मेट्रो को 9405 करोड़ का लोन

कानपुर : 17092 करोड़ रुपये के मेट्रो प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने के लिए अब 9405 करोड़ का लोन लिया जाएगा। लोन देने को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जाइका) और यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक तैयार हैं। जाइका जहां 1.0 फीसद वार्षिक वार्षिक ब्याज दर पर लोन देना चाहती है तो यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक 0.5 फीसद वार्षिक ब्याज दर पर लोन देने को तैयार हैं।

मेट्रो से बदलेगी साउथ की तस्वीर

मेट्रो रेल दौड़ने के साथ ही साउथ सिटी की तस्वीर भी बदलेगी। दूसरे चरण में सीएसए से बर्रा आठ तक मेट्रो चलेगी। इस रूट पर मेट्रो रेल चालू होने के बाद पांच लाख लोगों को ट्रैफिक के लोड से लगने वाले जाम व क्रासिंग बंद होने पर फंसने से राहत मिलेगी। साथ ही मेट्रो के रूट पर पड़ने वाले इलाके विकसित होने के साथ ही रोजगार के हब बन जाएंगे।

पूरब के मैनचेस्टर को मेट्रो

पूरब के मैनचेस्टर को मेट्रो

कानपुर : पूरब के मैनचेस्टर को मेट्रो की सौगात देने की आधारशिला रख दी गई। मंगलवार को पालिका स्टेडियम में भव्य समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, केंद्रीय शहरी विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्री एम. वेंकैया नायडू और सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी ने बटन दबाकर 13,721 करोड़ रुपये की मेट्रो परियोजना का शिलान्यास किया। पालिका स्टेडियम में शिलान्यास के साथ ही पालीटेक्निक में मेट्रो यार्ड का काम शुरू हो गया।

जाइका ने कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट का सर्वे किया शरू

जाइका के प्रतिनिधियों ने कानपुर मेट्रो का सर्वे शुरू करा दिया है। सर्वे में कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े आर्थिक और सामाजिक फायदों का जानकारी जुटाई जा रही है। सर्वे के शुरुआती रुझानों के बाद से ही जाइका मेट्रो प्रोजेक्ट को लोन देने के लिए उत्साहित है। हालांकि एलएमआरसी को यूरोपियन बैंक अधिक भा रहा है।

कानपुर मेट्रो को मंजूरी इसी माह!

अक्तूबर में लोकार्पण की तैयारी
शहर में सीएम से मेट्रो प्रोजेक्ट का शिलान्यास कराने की भी रूपरेखा बनने लगी है। प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चा का विषय बना रहा। सितंबर में यदि प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाती है तो अधिकारी अक्तूबर में मेट्रो का शिलान्यास करा सकते हैं।

आईआईटी से नौबस्ता तक मेट्रो के 22 स्टेशन

लखनऊ के बाद कानपुर में जल्द दौड़ेगी मेट्रो

कानपुर मेट्रो के लिए लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने पहला टेंडर जारी कर दिया है। यह टेंडर डिटेल डिजाइन कंसल्टेंट (डीडीसी) के लिए किया गया है।

सूबे में सबसे महंगी होगी कानपुर मेट्रो, 14 हजार करोड़ लागत

मेट्रो रेल सूबे में सबसे महंगी होगी। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के पहले तैयार ड्राफ्ट में परियोजना पर 14 हजार करोड़ खर्च का आकलन है। इसमें इस्तेमाल होने वाली जमीन की कीमत शामिल नहीं है। ड्राफ्ट के मुताबिक भूमिगत लाइन ज्यादा होने से परियोजना की कीमत बढ़ी है। लखनऊ में फिलहाल जो ट्रैक बन रहा है वह एलीवेटेड है। कानपुर में एलीवेटेड ट्रैक के लिए हर जगह सड़क नहीं है। इसके लिए कम से कम 80 फिट की सड़क हर तरफ होनी चाहिए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में मेट्रो के शिलान्यास के बाद कानपुर, आगरा, इलाहाबाद व वाराणसी में मेट्रो चलाने की घोषणा की थी। इन शहरों में डीपीआर तैयार हो रही है। इसमें कानपुर आगे है। यहां की परियोजना का ड्राफ्ट पहले ही तैयार किया जा चुका है। लखनऊ मेट्रो के पहले चरण में 32 स्टेशन और दो रूट रखे गए हैं जिनकी कुल लंबाई लगभग 34 किलोमीटर है जबकि कानपुर मेट्रो में भी दो रूट हैं मगर कुल लंबाई लगभग 29.5 किलोमीटर। हालांकि स्टेशनों की संख्या में कोई खास अंतर नहीं है। वहां भूमिगत लाइन लगभग नौ किलोमीटर ही है। इसलिए भी यहां की लागत बढ़ गई है। लखनऊ मेट्रो पर 12500 करोड़ खर्च हो रहे हैं।

मेट्रो चलाने को चाहिए 100 मेगावाट बिजली

मेट्रो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होने के साथ ही उसे दौड़ाने की कवायद भी तेज हो गई है। शहर के अंदर मेट्रो चलाने के लिए करीब 100 मेगावाट बिजली की जरूरत है। राइट्स ने उत्तर प्रदेश ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को पत्र भेजकर तीन इलाकों से 120 एमवीए (मेगा वोल्ट एम्पियर) का लोड मांगा है। ट्रांसमिशन अफसरों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। जरूरत के मुताबिक मेट्रो को फूलबाग, मेहरबान सिंह का पुरवा और नौबस्ता 220 केवी ट्रांसमिशन सब स्टेशन से बिजली दी जाएगी।राइट्स कंपनी जल्द से जल्द डीपीआर सौंपने की तैयारी में है। इसके लिए सड़क खोदकर मिट्टी का सैंपल भी लिया जा चुका है। अब बिजली की जरूरत पर भी मंथन शुरू हो गया है। राइट्स ने 220 केवी नौबस्ता, मेहरबान सिंह का पुरवा और फूलबाग ट्रांसमिशन सब स्टेशन से बिजली मांगी है। फूलबाग में नया 220 केवी ट्रांसमिशन सब स्टेशन बनाने की मंजूरी मिल गई है। दो महीने में टेंडर प्रक्रिया पूरी होकर काम शुरू हो जाएगा। राइट्स के भेजे गए पत्र में शहर के तीन हिस्से से मेट्रो के लिए बिजली मांगी गई है। फूलबाग ट्रांसमिशन सब स्टेशन बनने की स्वीकृति से अफसरों की परेशानी भी दूर हो गई है।

कानपुर के हर कोने तक पहुंचेगी मेट्रो

अगस्त के पहले सप्ताह में डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट मंडलायुक्त मो. इफ्तेखारुद्दीन, केडीए उपाध्यक्ष जयश्री भोज, लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के एमडी कुमार केशव, राइट्स के जीएम पीयूष कंसल, जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब, आईआईटी के प्रोफेसर विनोद वासुदेवन, नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह व एसएसपी शलभ माथुर के अलावा पीडब्लूडी, जल निगम, जल संस्थान और केस्को के अफसरों के सामने प्रस्तुत होगी। यह अंतरिम रिपोर्ट होगी जिसमें अगर कोई सुझाव या संशोधन कराना होगा तो अफसरों संग सेमिनार का आयोजन करके दिया जाएगा। पंद्रह दिन के भीतर राइट्स उसे पूरा करके फाइनल रिपोर्ट दे

कानपुर में मेट्रो स्टेशनों के बीच बढ़ेगी दूरी

कानपुर में मेट्रो स्टेशनों के रूट और स्टेशनों में आंशिक संशोधन किया गया है। अब उन मेट्रो स्टेशनों के बीच की दूरी बढ़ाई जाएगी जिनके बीच एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्टेशन तय किए गए हैं। मसलन, मोतीझील की जगह अब आकाशवाणी होगा नया स्टेशन। पहले रूट में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाद मोतीझील के शिवाजी गेट पर स्टेशन का स्थान तय किया गया था जो महज 700 मीटर ही दूर था। अब मेडिकल कॉलेज के आकाशवाणी की दूरी 1.2 किलोमीटर हो जाएगी। राइट्स ने सर्वे रिपोर्ट में रूट तय किया है उसमें कई स्टेशनों के बीच दूरी बहुत कम है।

आईआईटी से नौबस्ता तक मेट्रो के 22 स्टेशन

मेट्रो के लिए राइट्स ने जाना भूमि का सर्किल रेट

फिलहाल आईआईटी से नौबस्ता और सीएसए से जरौली तक दोनों रूट पर 25 हजार करोड़ के खर्च की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि डीपीआर ही तय करेगा कि परियोजना की लागत क्या होगी। डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।